कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए उसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से कर दी है। यह विवाद कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा आरएसएस के पंजीकरण और संपत्ति पर उठाए गए सवालों के बाद और गहरा गया है।

  • बी.के. हरिप्रसाद ने आरएसएस, जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान को 'गैर-पंजीकृत' होने के आधार पर एक समान बताया।
  • गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरएसएस की संपत्ति और बैंक खातों के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं।
  • बीजेपी नेता बी.एल. संतोष ने तर्क दिया कि आरएसएस को किसी कानूनी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।

बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने एक अत्यंत विवादित बयान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी समूहों से की। हरिप्रसाद का मुख्य तर्क यह था कि ये तीनों संगठन भारत में कानूनी रूप से पंजीकृत नहीं हैं, इसलिए उनके बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है।

यह बयान उस समय आया है जब कर्नाटक की राजनीति में आरएसएस की वैधानिकता को लेकर घमासान मचा हुआ है। हरिप्रसाद ने आगे यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस के सदस्य न तो वंदे मातरम गाते हैं, न राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं और न ही तिरंगा फहराते हैं, जिससे उनकी देशभक्ति पर सवाल उठते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह हमला केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। कांग्रेस पार्टी आरएसएस को 'पारदर्शिता' और 'कानूनी जवाबदेही' के मोर्चे पर घेरकर उसे एक संदिग्ध संस्था के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। यह विशेष रूप से कर्नाटक में अपने आधार को मजबूत करने और सरकार के खिलाफ आलोचनाओं से ध्यान हटाने का एक तरीका हो सकता है।

"जब कोई संगठन राष्ट्रव्यापी प्रभाव रखता है, तो उसकी वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी अस्तित्व केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा होता है।"

इस विवाद की जड़ें गृह मंत्री प्रियंक खड़गे के उन सवालों में हैं, जिनमें उन्होंने पूछा कि आरएसएस किस कानून के तहत संपत्ति रखता है, उसके बैंक खाते किसके नाम पर हैं और 'गुरुदक्षिणा' के रूप में प्राप्त दान का ऑडिट कैसे होता है। खड़गे का स्पष्ट कहना है कि इतिहास कानूनी पारदर्शिता का विकल्प नहीं हो सकता।

दूसरी ओर, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरएसएस 1925 से बिना किसी वैधानिक स्थिति के कार्य कर रहा है और जनता का विश्वास ही उसकी असली पहचान है। उन्होंने तर्क दिया कि विभाजन के समय और अन्य संकटों के दौरान संघ ने बिना किसी सरकारी प्रमाण पत्र के देश की सेवा की है।

पक्ष मुख्य तर्क मांग/दावा
कांग्रेस (KPCC) पंजीकरण का अभाव और संदिग्ध वित्तपोषण कानूनी पंजीकरण और ऑडिट रिपोर्ट की मांग
बीजेपी/आरएसएस जनविश्वास और ऐतिहासिक सेवा पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है
क्या आप जानते हैं?: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार द्वारा की गई थी और यह दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक माना जाता है।

Frequently Asked Questions

1. बी.के. हरिप्रसाद ने आरएसएस की तुलना किन संगठनों से की?
उन्होंने आरएसएस की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से की, क्योंकि उनके अनुसार तीनों ही भारत में पंजीकृत नहीं हैं।

2. प्रियंक खड़गे के मुख्य सवाल क्या हैं?
खड़गे ने पूछा है कि आरएसएस किस कानून के तहत संपत्ति रखता है, उसके बैंक खाते किसके नाम पर हैं और उसके ऑडिटेड खाते कहां हैं।