पी. चिदंबरम के एक बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, इसे 'दिमागी नक्सल कांग्रेस' करार दिया है। भाजपा का दावा है कि विपक्ष ने स्वयं अपनी विचारधारा को उजागर कर दिया है।

  • भाजपा ने पी. चिदंबरम के 'दिमागी नक्सल' होने के दावे को कांग्रेस की आधिकारिक स्वीकारोक्ति बताया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से 'दिमागी नक्सलियों' को पहचानने और अलग-थलग करने का आह्वान किया था।
  • भाजपा ने कांग्रेस को 'मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस' और 'दिमागी नक्सल कांग्रेस' के रूप में संबोधित किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी पर एक नया और गंभीर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल ने अब यह स्वीकार कर लिया है कि वह केवल एक 'मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस' ही नहीं, बल्कि एक 'दिमागी नक्सल कांग्रेस' भी बन चुका है। यह विवाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जब चिदंबरम स्वयं सामने आकर यह कह रहे हैं कि वह दिमागी नक्सल होने पर गर्व महसूस करते हैं, तो अब इसमें किसी संदेह या 'यदि-किंतु' की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने स्वयं ही अपनी असली विचारधारा दुनिया के सामने प्रकट कर दी है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल शब्दों की लड़ाई नहीं है, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक विमर्श के बीच के गहरे टकराव को दर्शाता है। जब सत्ता पक्ष 'दिमागी नक्सलवाद' जैसे शब्दों का प्रयोग करता है, तो वह यह संकेत देता है कि खतरा अब केवल जंगलों में मौजूद हथियारबंद विद्रोहियों से नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर बैठे उन लोगों से है जो नीतियों के माध्यम से समाज में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।

"राजनीतिक विमर्श में 'नक्सल' शब्द का प्रयोग अब केवल सशस्त्र विद्रोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे वैचारिक युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।"

इस पूरे विवाद की जड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने देश को चेतावनी दी थी कि हालांकि भारत जंगलों से सशस्त्र माओवाद को हटाने में सफल रहा है, लेकिन उनके वैचारिक समर्थक अभी भी व्यवस्था में घुसे हुए हैं और समाज को गुमराह कर हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के अवसर तलाश रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की थी कि वे ऐसे 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान करें और उन्हें अलग-थलग करें। इसी के जवाब में पी. चिदंबरम ने पलटवार करते हुए कहा था कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' कहलाने में गर्व है, जिसे अब भाजपा ने कांग्रेस की 'स्वीकारोक्ति' के रूप में पेश किया है।

क्या आप जानते हैं?: नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी, जो मूल रूप से एक भूमि सुधार आंदोलन था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 'दिमागी नक्सल' शब्द का प्रयोग किसने शुरू किया?
इस शब्द का प्रयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने संबोधन के दौरान किया था।

2. पी. चिदंबरम की प्रतिक्रिया क्या थी?
पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के कटाक्ष का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है।