कर्नाटक विधानसभा में वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर भारी हंगामा हुआ, जहाँ भाजपा और जद(स) ने मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। नागेंद्र ने इन आरोपों को केंद्रीय एजेंसियों की साजिश करार दिया है।
- मंत्री बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि निगम घोटाले में इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
- नागेंद्र ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां उनके खिलाफ साजिश रच रही हैं।
- भाजपा और जद(स) के विरोध के कारण कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही बाधित हुई।
- मामला ₹89.63 करोड़ के कथित वित्तीय हेरफेर से जुड़ा है।
बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया। सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के मंत्री बी. नागेंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे, जबकि विपक्षी दल भाजपा और जनता दल (सेकुलर) ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विरोध प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही को लगातार तीसरे दिन स्थगित करना पड़ा।
मंत्री नागेंद्र, जो वर्तमान में योजना, कार्यक्रम निगरानी और सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो संभाल रहे हैं, ने खुद को निर्दोष बताते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश के तहत काम कर रही हैं। नागेंद्र ने कहा, "केंद्रीय एजेंसियों ने मेरे खिलाफ साजिश रची है। अदालत से जमानत मिलने के बाद, मैंने पार्टी से मुझे एक अवसर देने का अनुरोध किया था।"
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक वित्तीय घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों और केंद्रीय बनाम राज्य शक्ति के संघर्ष का प्रतीक बन गया है। नागेंद्र ने विरोधियों पर 'मनुवादी' होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक आदिवासी समुदाय का व्यक्ति मंत्री बनने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
"नागेंद्र का यह बयान दर्शाता है कि राजनीति अब भ्रष्टाचार के आरोपों से हटकर पहचान की राजनीति और संस्थागत संघर्ष की ओर बढ़ रही है।"
गौरतलब है कि जून 2024 में नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति निगम में धन के दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। हाल ही में, सीबीआई (CBI) ने ₹89.63 करोड़ के धोखाधड़ी वाले मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अगस्त में उन्हें फिर से कैबिनेट में शामिल किया गया था।
विपक्ष के हंगामे के बीच, विधानसभा अध्यक्ष जी.एस. पाटिल को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। नागेंद्र ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश भर में भाजपा शासित राज्यों के कई मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन केवल उन्हें ही निशाना बनाया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बी. नागेंद्र पर क्या आरोप हैं?
उत्तर: उन पर वाल्मीकि निगम के फंड में ₹89.63 करोड़ के कथित हेरफेर और दुरुपयोग का आरोप है।
प्रश्न 2: विपक्ष की मांग क्या है?
उत्तर: भाजपा और जद(स) मांग कर रहे हैं कि घोटाले में नाम आने के कारण नागेंद्र को तुरंत मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।