कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि जनगणना प्रश्नावली से जानबूझकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी को हटाया गया है। पार्टी का दावा है कि यह डेटा को छिपाने की एक गहरी साजिश है।
- कांग्रेस ने जनगणना प्रश्नावली में OBC कॉलम की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- पार्टी का आरोप है कि 'ओपन-एंडेड' प्रश्नों के कारण डेटा संग्रह में भारी तकनीकी खामियां आएंगी।
- राहुल गांधी द्वारा 2023 से की जा रही जाति जनगणना की मांग का हवाला दिया गया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आगामी जनगणना की प्रश्नावली से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी को जानबूझकर बाहर रखा गया है। पार्टी के अनुसार, यह कदम केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि समुदाय की वास्तविक जनसंख्या को आधिकारिक आंकड़ों से दूर रखने की एक "गहरी साजिश" है।
कांग्रेस के OBC विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलासा किया कि 14 अगस्त को जारी की गई प्रश्नावली के 10वें प्रश्न में OBC श्रेणी का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एक अलग कॉलम के बिना, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा और यह पता लगाना असंभव हो जाएगा कि देश में वास्तव में कितने OBC नागरिक हैं।
तकनीकी खामियां और डेटा का संकट
अनिल जयहिंद ने प्रश्नावली में 'ओपन-एंडेड' (खुले) प्रश्नों के उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जब लोग अपनी जाति खुद लिखेंगे, तो क्षेत्रीय नामों, पर्यायवाची शब्दों और वर्तनी की भिन्नताओं के कारण एक ही समुदाय के लाखों अलग-अलग नाम दर्ज हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने हरियाणा का जिक्र किया, जहाँ बढ़ई समुदाय को जांगिड़, जांगड़ा, खाती, धीमान और विश्वकर्मा जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है।
"यदि गणनाकर्ता 46 लाख अलग-अलग जातियों का डेटा एकत्र करते हैं, तो सरकार इस विशाल और अव्यवस्थित डेटा का उपयोग वैज्ञानिक जाति जनगणना न करने के बहाने के रूप में करेगी।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि जाति जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह आरक्षण और संसाधनों के वितरण से सीधे तौर पर जुड़ी है। यदि OBC डेटा सटीक नहीं होता, तो भविष्य में कल्याणकारी योजनाओं और संवैधानिक लाभों के निर्धारण में भारी विवाद पैदा हो सकते हैं। यह राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि यह सीधे तौर पर 'सोशल जस्टिस' की लड़ाई से जुड़ा है।
कांग्रेस ने तेलंगाना सरकार द्वारा किए गए जाति सर्वेक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 242 जातियों की एक सूची के साथ 54 प्रश्नों वाली एक विस्तृत प्रश्नावली का उपयोग किया गया था। पार्टी ने मांग की कि केंद्र सरकार को भी इसी तरह के वैज्ञानिक और पारदर्शी दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए।
| विशेषता | केंद्र की वर्तमान प्रश्नावली (आरोपानुसार) | तेलंगाना मॉडल (संदर्भ) |
|---|---|---|
| OBC कॉलम | अनुपस्थित/अस्पष्ट | स्पष्ट और विस्तृत |
| प्रश्न का प्रकार | ओपन-एंडेड (खुला) | सूची-आधारित (Structured) |
| दृष्टिकोण | अस्पष्ट/तकनीकी जटिल | वैज्ञानिक और पारदर्शी |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कांग्रेस ने जनगणना प्रश्नावली पर क्या आपत्ति जताई है?
कांग्रेस का आरोप है कि प्रश्नावली से OBC कॉलम को जानबूझकर हटाया गया है ताकि वास्तविक जनसंख्या का पता न चले।
प्रश्न 2: 'ओपन-एंडेड' प्रश्नों से क्या समस्या हो सकती है?
इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम और स्पेलिंग दर्ज हो सकते हैं, जिससे डेटा का विश्लेषण करना कठिन हो जाएगा।