पला नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक एक दिन पहले राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। विद्रोही पार्षद लिसीकुट्टी मैथ्यू की कांग्रेस में वापसी और उपाध्यक्ष पद को लेकर LDF के बीच जारी अनिश्चितता ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।
- पला नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है।
- विद्रोही पार्षद लिसीकुट्टी मैथ्यू ने कांग्रेस का दामन दोबारा थामा है।
- माया राहुल को 'सेव कांग्रेस फोरम' और LDF का समर्थन प्राप्त है।
- उपाध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर LDF और विद्रोही पार्षदों में मतभेद।
केरल के पला नगर पालिका में राजनीतिक गहमागहमी अपने चरम पर है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) समर्थित अध्यक्ष दिया पुलिक्ककंदन के हटाए जाने के एक महीने बाद, अब नए अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी है। यह चुनाव बुधवार (19 अगस्त, 2026) को होना तय है, लेकिन अंतिम समय में हुए उलटफेर ने सभी गणनाओं को बदल दिया है।
वर्तमान स्थिति में, कांग्रेस की विद्रोही नेता और कार्यवाहक अध्यक्ष माया राहुल मजबूत स्थिति में नजर आ रही हैं, क्योंकि उन्हें लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, चुनाव से महज एक दिन पहले विद्रोही पार्षद लिसीकुट्टी मैथ्यू की कांग्रेस में वापसी ने इस समीकरण में नया मोड़ ला दिया है। मैथ्यू ने स्पष्ट किया है कि वह LDF समर्थित किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देंगी।
सूत्रों के अनुसार, लिसीकुट्टी मैथ्यू की वापसी का मुख्य कारण अन्य विद्रोही पार्षदों के साथ अध्यक्ष पद की साझेदारी को लेकर हुआ विवाद है। मैथ्यू पहले कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनना चाहती थीं, जबकि अन्य सदस्यों का मानना था कि पूर्व समझौते के अनुसार माया राहुल को यह मौका मिलना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह केवल एक स्थानीय चुनाव नहीं है, बल्कि केरल की क्षेत्रीय राजनीति में छोटे दलों और विद्रोही गुटों की बढ़ती ताकत का संकेत है। यह दर्शाता है कि कैसे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और पद का लालच बड़े गठबंधन के अनुशासन को कमजोर कर सकता है।
"पला की यह राजनीतिक अस्थिरता दर्शाती है कि गठबंधन राजनीति में विश्वास की कमी अब स्थानीय निकायों तक गहराई से पहुँच चुकी है।"
उम्मीदवारों के अलावा, उपाध्यक्ष पद को लेकर भी भारी अनिश्चितता है। हालांकि LDF ने अध्यक्ष पद पर सहमति बना ली है, लेकिन उपाध्यक्ष पद के लिए केरल कांग्रेस (M) के भीतर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि उनके संसदीय दल के नेता बीजू पालोपडावन ने शुरू में रुचि नहीं दिखाई थी, लेकिन अब उनकी पार्टी के पार्षदों का दबाव बढ़ गया है, जिससे 'सेव कांग्रेस फोरम' के सदस्यों के बीच तनाव पैदा हो गया है।
| गठबंधन/समूह | पार्षदों की संख्या | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|
| LDF (KC-M + CPI-M) | 12 | मजबूत आधार |
| सेव कांग्रेस फोरम | 4 | किंगमेकर की भूमिका |
| UDF (Congress + others) | 10 | संख्यात्मक चुनौती |
पला नगर पालिका की 26 सदस्यीय परिषद में, यदि LDF और सेव कांग्रेस फोरम एक साथ रहते हैं, तो उनकी कुल ताकत 16 हो जाएगी, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है। दूसरी ओर, UDF के पास वर्तमान में 10 सदस्य हैं, जिसमें कांग्रेस, केरल कांग्रेस (जोसेफ) और स्वतंत्र समूह शामिल हैं।
Frequently Asked Questions
1. माया राहुल की उम्मीदवारी क्यों मजबूत है?
उन्हें सेव कांग्रेस फोरम और LDF दोनों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उनके पास बहुमत का आंकड़ा होने की प्रबल संभावना है।
उनकी वापसी से UDF की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है और LDF-विद्रोही गठबंधन के बीच एक दरार उजागर हुई है।