प्रसिद्ध इतिहासकार सुमित सरकार का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने 'सबाल्टर्न स्टडीज' और आधुनिक भारतीय इतिहास के लेखन में अमूल्य योगदान दिया।

  • सुमित सरकार का 87 वर्ष की आयु में निधन, वे आधुनिक भारत के अग्रणी इतिहासकारों में से एक थे।
  • उन्होंने 'सबाल्टर्न स्टडीज' (इतिहास नीचे से) के माध्यम से हाशिए के लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा में लाया।
  • वे जीवन भर मार्क्सवादी विचारधारा के प्रति समर्पित रहे और हिंदू राष्ट्रवाद के उदय के प्रति सचेत थे।

आधुनिक भारतीय इतिहास के क्षेत्र में एक ऐसा नाम जिसने अकादमिक जगत को नई दिशा दी, सुमित सरकार अब हमारे बीच नहीं रहे। 13 अगस्त को 87 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वे न केवल एक महान विद्वान थे, बल्कि एक अत्यंत विनम्र और मिलनसार व्यक्तित्व के स्वामी भी थे। उनके निधन से इतिहास लेखन की उस परंपरा को गहरा धक्का लगा है जो तथ्यों और विश्लेषण को सर्वोपरि मानती है।

सुमित सरकार का बौद्धिक सफर उनके पारिवारिक परिवेश से प्रभावित था। उनके पिता, प्रोफेसर सुशोभन सरकार, बंगाली बौद्धिक वामपंथ के एक स्तंभ थे। इसी प्रभाव के कारण सुमित सरकार जीवन भर मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़े रहे, भले ही समय के साथ दुनिया भर में इस विचारधारा की लोकप्रियता कम हुई। उन्होंने इतिहास को केवल राजाओं और शासकों की कहानी मानने के बजाय उसे आम जनता और शोषितों के नजरिए से देखने का प्रयास किया।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, सुमित सरकार का महत्व केवल उनकी किताबों में नहीं, बल्कि उनकी उस साहसपूर्ण दृष्टि में था जिसने 'सबाल्टर्न स्टडीज' को जन्म दिया। जब मुख्यधारा का इतिहास केवल अभिजात वर्ग की बात कर रहा था, तब सरकार ने 'नीचे से इतिहास' (History from below) की वकालत की। हालांकि, बाद में जब यह समूह उत्तर-आधुनिकतावाद (Postmodernism) की ओर मुड़ा, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी असहमति जताई, क्योंकि उनका मानना था कि ऐतिहासिक सत्य का अस्तित्व होता है और उसे नकारा नहीं जा सकता।

सुमित सरकार ने यह साबित किया कि एक विद्वान को अपनी विचारधारा के प्रति ईमानदार रहते हुए भी बौद्धिक लचीलापन बनाए रखना चाहिए।

अपने अंतिम वर्षों में, वे भारत में बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति को लेकर बेहद चिंतित थे। उन्होंने कई लेखों के माध्यम से यह चेतावनी दी कि कैसे तथ्यों की अनदेखी कर इतिहास को बदला जा रहा है। उनका मानना था कि उत्तर-आधुनिकतावाद ने अनजाने में उन ताकतों को मदद दी है जो ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करती हैं।

उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो वे अपनी पत्नी तानिका और पुत्र आदित्य के साथ गहरे बौद्धिक संबंध साझा करते थे, जो स्वयं भी कुशल इतिहासकार हैं। उनकी अंतिम मुलाकातें उनके शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उनकी मानसिक स्पष्टता और दुनिया की विसंगतियों पर हंसने की क्षमता को दर्शाती हैं।

क्या आप जानते हैं?: सुमित सरकार ने रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध पुस्तक 'सहज पथ' का गहन अध्ययन किया था और टैगोर के सामाजिक दृष्टिकोण पर अपनी अलग राय रखी थी।

1. सुमित सरकार का इतिहास लेखन में मुख्य योगदान क्या था?
उनका सबसे बड़ा योगदान 'सबाल्टर्न स्टडीज' के माध्यम से इतिहास को आम जनता और वंचित वर्गों के परिप्रेक्ष्य से लिखना था।

2. उन्होंने उत्तर-आधुनिकतावाद का विरोध क्यों किया?
उनका मानना था कि उत्तर-आधुनिकतावाद ऐतिहासिक सत्य की अवधारणा को खत्म करता है, जिससे तथ्यों के बजाय विमर्श (narratives) हावी हो जाते हैं।