शिवमोग्गा में मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। शिवमोगा सांसद बी.वाई. राघवेंद्र ने सरकार को चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर विधान सौधा का घेराव किया जाएगा।
- बी. नागेंद्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
- शिवमोगा सांसद बी.वाई. राघवेंद्र ने 24 घंटे के भीतर इस्तीफे की मांग की है।
- भाजपा ने मांग पूरी न होने पर विधान सौधा के घेराव की चेतावनी दी है।
- कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में विफलताओं का भी आरोप लगाया गया है।
कर्नाटक की राजनीति में उबाल आ गया है। भाजपा द्वारा मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को अपने दूसरे दिन में प्रवेश कर गया। शिवमोग्गा में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के परिसर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शिवमोगा के सांसद बी.वाई. राघवेंद्र ने शिरकत की और सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
सांसद राघवेंद्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार को 24 घंटों के भीतर बी. नागेंद्र को कैबिनेट से बाहर कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग को तुरंत स्वीकार नहीं किया गया, तो भाजपा कार्यकर्ता राजधानी बेंगलुरु में विधान सौधा का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।
भ्रष्टाचार और आत्महत्या का गहरा मामला
इस पूरे विवाद की जड़ कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित भ्रष्टाचार है। राघवेंद्र ने आरोप लगाया कि नागेंद्र पर अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए निर्धारित धन का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब निगम के एक अधिकारी, चंद्रशेखर ने आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसने इस घोटाले की जांच को और अधिक गंभीर बना दिया है।
ऐसे मंत्री को दोबारा कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाना चाहिए था; मुख्यमंत्री को तुरंत कड़ा निर्णय लेना होगा।
कल्याणकारी योजनाओं पर भी उठाए सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान, सांसद ने कांग्रेस सरकार की 'गारंटी योजनाओं' की विफलता पर भी प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह ज्योति योजना के तहत मुफ्त बिजली का वादा किया गया था, लेकिन अधिकांश लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसी तरह, शक्ति योजना के बावजूद स्कूली बच्चों को बस सेवा की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन केवल एक इस्तीफे की मांग नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राज्य में सत्तारूढ़ सरकार की छवि को कमजोर करने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति भी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नाटक में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण मंत्रियों का इस्तीफा देना एक पुराना पैटर्न रहा है। वाल्मीकि निगम मामला राज्य की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है क्योंकि यह सीधे तौर पर अनुसूचित जनजाति के अधिकारों और उनके लिए आवंटित बजट से जुड़ा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बी. नागेंद्र पर मुख्य आरोप क्या हैं?
उत्तर: उन पर वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में भ्रष्टाचार और दुरुपयोग करने के आरोप हैं।
प्रश्न 2: भाजपा का अगला कदम क्या होगा?
उत्तर: यदि इस्तीफा नहीं मिलता है, तो भाजपा विधान सौधा का घेराव करने की योजना बना रही है।