कर्नाटक के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के दौरान 1.08 करोड़ से अधिक मतदाता 'ASDDO' श्रेणी में डाल दिए गए हैं। त्रुटिपूर्ण फॉर्म, प्रशिक्षण की कमी और भ्रमित करने वाले निर्देशों ने इस बड़े चुनावी संकट को जन्म दिया है।
- 1.08 करोड़ से अधिक मतदाता कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर होने की कगार पर हैं।
- ASDDO (अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लिकेट, मृत और अन्य) श्रेणी में मतदाताओं के शामिल होने का मुख्य कारण प्रक्रियात्मक खामियां हैं।
- 2002 की आधार सूची का उपयोग और कन्नड़-मात्र फॉर्म ने भ्रम पैदा किया।
- प्रशिक्षण की कमी और BLOs के बीच विरोधाभासी निर्देशों ने स्थिति को बिगाड़ा।
कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR)-2026 अभियान ने एक गंभीर प्रशासनिक संकट खड़ा कर दिया है। राज्य के ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, 1.08 करोड़ से अधिक मतदाता 'ASDDO' (Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others) श्रेणी में डाल दिए गए हैं। यह आंकड़ा न केवल कर्नाटक के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चिंताजनक है, क्योंकि दिल्ली में यह संख्या 47.7 लाख और तेलंगाना में 73.39 लाख है।
इस संकट की जड़ें प्रक्रिया के कार्यान्वयन में मौजूद गहरी कमियों में छिपी हैं। मतदाताओं को एक ऐसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा जो भ्रमित करने वाले निर्देशों, जागरूकता की कमी और तकनीकी विसंगतियों से भरी थी। Booth Level Officers (BLOs) द्वारा दिए गए निर्देश अक्सर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के निर्देशों से मेल नहीं खाते थे, जिससे आम नागरिक पूरी तरह असमंजस में रहे।
क्यों यह मामला गंभीर है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल डेटा प्रविष्टि की गलती नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक भागीदारी के अधिकार पर सीधा प्रहार है। जब एक बड़ी आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाता है, तो उनका वोट देने का संवैधानिक अधिकार खतरे में पड़ जाता है।
भ्रम का एक मुख्य कारण 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाना था। कई मतदाता जो 24 साल पहले उस सूची का हिस्सा थे, अब अपने पुराने मतदान केंद्रों या निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को याद रखने में असमर्थ थे। इसके अलावा, 2008 के परिसीमन (Delimitation) के बाद सीमाओं में आए बदलावों ने इस समस्या को और जटिल बना दिया।
प्रक्रियात्मक त्रुटियां और प्रशिक्षण का अभाव सीधे तौर पर मतदाताओं के मताधिकार को प्रभावित कर रहा है।
मुख्य समस्याएँ और विसंगतियां
| कारण | प्रभाव |
|---|---|
| 2002 बेस रोल का उपयोग | पुराने पते और सीमाओं को खोजने में कठिनाई |
| कन्नड़-मात्र फॉर्म | गैर-कन्नड़ भाषियों के लिए पढ़ने में मुश्किल |
| BLO प्रशिक्षण की कमी | विभिन्न अधिकारियों द्वारा अलग-अलग निर्देश |
| प्रौद्योगिकी अंतराल | ऐप द्वारा उत्पन्न डेटा विसंगतियां |
एक अन्य बड़ी समस्या 'प्रोजेनी मैपिंग' (Progeny Mapping) को लेकर थी। नए मतदाताओं को अपने माता-पिता या रिश्तेदारों के माध्यम से अपना लिंक स्थापित करना था, लेकिन फॉर्म में 'नाम' कॉलम का अर्थ अलग-अलग BLOs ने अलग-अलग बताया। कुछ ने स्वयं का नाम भरने को कहा, तो कुछ ने रिश्तेदारों का।
बेंगलुरु जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर होने वाले प्रवासन (Migration) ने भी ASDDO संख्या को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। जो लोग काम के लिए स्थान बदल लेते हैं लेकिन पता अपडेट नहीं कर पाते, उन्हें 'स्थानांतरित' (Shifted) मान लिया जाता है।
Frequently Asked Questions
Q1: ASDDO श्रेणी का क्या अर्थ है?
A: इसका मतलब है अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), डुप्लिकेट (Duplicate), मृत (Dead) और अन्य (Others) श्रेणी के मतदाता।
Q2: इस समस्या का मुख्य कारण क्या है?
A: मुख्य कारणों में प्रशिक्षण की कमी, 2002 की पुरानी सूची का उपयोग और भ्रमित करने वाले फॉर्म शामिल हैं।