कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने उडुपी जिले के महालक्ष्मी सहकारी बैंक में ₹25 करोड़ के कथित घोटाले और बैंक प्रबंधक की संदिग्ध मृत्यु की जांच के लिए एसआईटी गठन की मांग की है।
- महालक्ष्मी सहकारी बैंक में ₹25 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप।
- बैंक के चेयरमैन एक स्थानीय भाजपा विधायक हैं।
- बैंक प्रबंधक की संदिग्ध मृत्यु, जिसे हत्या का संदेह बताया जा रहा है।
- कांग्रेस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) और प्रशासक की मांग की है।
कर्नाटक के विधान परिषद में कांग्रेस सदस्य बीके हरिप्रसाद ने उडुपी जिले के मालपे स्थित महालक्ष्मी सहकारी बैंक में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की पुरजोर मांग की है। हरिप्रसाद ने सदन को सूचित किया कि बैंक में बड़े पैमाने पर जालसाजी की गई है, जिससे सरकारी और सार्वजनिक धन को भारी नुकसान पहुँचा है।
हरिप्रसाद के अनुसार, इस घोटाले में ₹25 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का अनुमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करके यह दिखाया गया कि ग्राहकों ने बैंक से ऋण लिया है, जबकि वास्तव में ऐसी कोई ऋण प्रक्रिया नहीं हुई थी। इस घोटाले की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि बैंक के अध्यक्ष एक स्थानीय भाजपा विधायक (MLA) हैं, जिससे राजनीतिक मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सहकारी बैंकों में इस तरह की अनियमितताएं न केवल आम depositors के विश्वास को तोड़ती हैं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती हैं। जब राजनीतिक नेतृत्व वित्तीय संस्थानों के शीर्ष पर होता है, तो जवाबदेही सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
सहकारी बैंकों में राजनीतिक हस्तक्षेप और वित्तीय अनियमितताओं का संगम लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव को कमजोर करता है।
मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब हरिप्रसाद ने हाल ही में बैंक प्रबंधक की मृत्यु का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हालांकि इसे आत्महत्या बताया जा रहा है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी हैं कि यह हत्या का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने अज्ञात व्यक्तियों की संलिप्तता की आशंका जताते हुए गहन जांच की मांग की है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रयरेड्डी ने कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे सहयोग मंत्री और राज्य सरकार से मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआईटी गठित करने का अनुरोध करेंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र अक्सर स्थानीय राजनीतिक दिग्गजों के नियंत्रण में रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, कई राज्यों में सहकारी बैंकों में ऋण धोखाधड़ी और प्रबंधन में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, जिससे नियामक संस्थाओं को अपनी निगरानी बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
Frequently Asked Questions
1. बीके हरिप्रसाद ने क्या मांग की है?
उन्होंने महालक्ष्मी सहकारी बैंक में ₹25 करोड़ के घोटाले की जांच के लिए एसआईटी और बैंक में प्रशासक की नियुक्ति की मांग की है।
2. बैंक प्रबंधक की मृत्यु का क्या मामला है?
प्रबंधक की मृत्यु को आत्महत्या बताया गया है, लेकिन कांग्रेस ने इसे संदिग्ध मानते हुए हत्या की आशंका जताई है।