केरल के विपक्ष के नेता पिणारई विजयन ने जनगणना 2027 के प्रश्नावली में माता-पिता के धर्म और जन्म स्थान की जानकारी मांगने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने इसे नागरिकता से जोड़ने की एक साजिश बताया है।

  • जनगणना 2027 में माता-पिता के धर्म और जन्म स्थान की जानकारी मांगी जा सकती है।
  • विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार जनगणना के माध्यम से NPR को लागू करने की कोशिश कर रही है।
  • पिणारई विजयन ने धर्म को नागरिकता से जोड़ने वाली नीतियों को अस्वीकार्य बताया है।

केरल के विपक्ष के नेता पिणारई विजयन ने आगामी जनगणना 2027 की प्रस्तावित प्रश्नावली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस बार के सवालों में माता-पिता के धर्म और उनके जन्म स्थान जैसी संवेदनशील जानकारियां मांगी जा रही हैं, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के एजेंडे की ओर इशारा करती हैं।

विजयन ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हालांकि जनगणना और NPR दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, लेकिन केंद्र सरकार इन दोनों को आपस में मिलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने 2018-19 की गृह मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि NPR वास्तव में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की तैयारी का एक चरण है, जिसका उपयोग डेटा फिल्टर करने के लिए किया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल डेटा संग्रह का नहीं है, बल्कि भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और नागरिकता के मानदंडों से जुड़ा है। यदि जनगणना के माध्यम से धार्मिक डेटा का व्यापक संग्रह किया जाता है, तो इसके सामाजिक और राजनीतिक परिणाम दूरगामी हो सकते हैं, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के बीच।

धर्म को नागरिकता के आधार के रूप में इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

विजयन ने आगे कहा कि केरल में LDF सरकार के कार्यकाल के दौरान यह स्पष्ट किया गया था कि राज्य में किसी भी परिस्थिति में NPR लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने UDF सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस का इतिहास भी NPR के कार्यान्वयन को लेकर विवादों से भरा रहा है, जिसके कारण वे इस मुद्दे पर मौन हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में जनगणना का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन नागरिकता से जुड़ी प्रक्रियाओं जैसे NPR और NRC ने हाल के वर्षों में तीव्र राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। 2010 में UPA सरकार के दौरान NPR का कार्यान्वयन शुरू हुआ था, जिसे बाद में भाजपा सरकार के तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के साथ जोड़ा गया।

Did You Know?: भारत में जनगणना हर 10 साल में आयोजित की जाती है, लेकिन 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।

Frequently Asked Questions

1. जनगणना 2027 और NPR में क्या अंतर है?
जनगणना जनसंख्या की सांख्यिकीय गणना है, जबकि NPR एक पहचान रजिस्टर है जो नागरिकता की पुष्टि के लिए आधार बन सकता है।

2. पिणारई विजयन ने किन सवालों का विरोध किया है?
उन्होंने माता-पिता के धर्म और उनके जन्म स्थान से संबंधित प्रश्नों का विरोध किया है।