पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस ने पंचकूला में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से नियुक्त कर्मियों के नियमितीकरण की मांग की गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने और अनुबंध प्रणाली को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
- कांग्रेस ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से भर्ती किए गए कर्मियों के नियमितीकरण की मांग की है।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अनुबंध प्रणाली को बढ़ावा देकर आरक्षण के प्रावधानों को कमजोर कर रही है।
- कांग्रेस ने सरकारी पदों की संख्या 4 लाख से घटाकर 2.5 लाख करने पर सरकार को घेरा है।
हरियाणा में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। बुधवार को पंचकूला में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया। कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से नियुक्त किए गए कर्मचारियों को नियमित करना और सरकार की कथित 'अनुबंध नीति' का विरोध करना है।
प्रदर्शन के दौरान हुड्डा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार युवाओं का शोषण कर रही है। उन्होंने मांग की कि निगम के माध्यम से भर्ती सभी कर्मचारियों को सरकारी सेवा में नियमित किया जाए और उन्हें समान वेतनमान, महंगाई भत्ता (DA), पदोन्नति के अवसर, आरक्षण लाभ और सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। हुड्डा ने जोर देकर कहा कि भविष्य में सभी नियुक्तियां नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से होनी चाहिए।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी है। हुड्डा का तर्क है कि राजपत्रित (Gazetted) पदों को भी निगम के माध्यम से भरने से दलितों, पिछड़ों और गरीबों के लिए आरक्षित पदों का कोटा प्रभावित हो रहा है। यदि अनुबंध प्रणाली को बढ़ावा मिलता है, तो आरक्षण के संवैधानिक लाभों को दरकिनार करना आसान हो जाएगा।
सरकार की अनुबंध नीति न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह सामाजिक आरक्षण की नींव को भी कमजोर कर रही है।
कांग्रेस नेता ने सरकार की आर्थिक और रोजगार नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान सरकारी पदों की संख्या 4 लाख तक बढ़ाई गई थी, लेकिन वर्तमान भाजपा-जेजेपी सरकार ने इसे घटाकर मात्र 2.5 लाख कर दिया है। हुड्डा ने इसे हरियाणा को 'देश की बेरोजगारी राजधानी' बनाने की दिशा में एक कदम बताया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हरियाणा में रोजगार और सरकारी भर्तियों को लेकर राजनीति हमेशा से केंद्र में रही है। पिछले चुनावों के दौरान, भाजपा ने 1,25,000 कुशल अनुबंध श्रमिकों के नियमितीकरण का वादा किया था। कांग्रेस का दावा है कि सरकार अपने चुनावी वादों से मुकर गई है और अब केवल अनुबंधों के माध्यम से अस्थायी व्यवस्था चला रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. कांग्रेस की मुख्य मांग क्या है?
कांग्रेस मांग कर रही है कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत काम कर रहे सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए और उन्हें पूर्ण सरकारी सुविधाएं दी जाएं।
2. हुड्डा ने आरक्षण को लेकर क्या चिंता जताई है?
हुड्डा का कहना है कि अनुबंध प्रणाली के माध्यम से नियुक्तियां करने से दलितों और पिछड़ों के लिए आरक्षित पदों का लाभ नहीं मिल पाता है।