आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान आयोजित ग्रुप-1 परीक्षाओं में गंभीर घोटाले का आरोप लगाया है। सीएफएसएल रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि अनधिकृत कर्मियों ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया।
- नायडू ने दावा किया कि प्लंबर, ड्राइवर और निर्माण श्रमिकों ने ग्रुप-1 की उत्तर पुस्तिकाएं जांचीं।
- सीएफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, 734 में से 718 उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं।
- मूल्यांकन प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन और अनधिकृत डिजिटल मूल्यांकन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में एक विस्फोटक खुलासा करते हुए पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल के दौरान आयोजित प्रतिष्ठित ग्रुप-1 परीक्षाओं में व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। नायडू ने केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया ही संदिग्ध और अवैध थी।
मुख्यमंत्री ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन पदों के लिए उच्च योग्यता की आवश्यकता होती है, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने के लिए इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, डेटा-एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर और निर्माण श्रमिकों जैसे अनधिकृत व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था। नायडू ने सवाल उठाया कि एक उच्च-स्तरीय प्रशासनिक परीक्षा की गरिमा को इस तरह कैसे कुचला जा सकता है?
परीक्षा की विश्वसनीयता पर गहरा संकट
नायडू के अनुसार, फोरेंसिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि 734 उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई, जिनमें से 718 (लगभग 97.82%) में अत्यधिक ओवरराइटिंग, जोड़-तोड़ और बदलाव पाए गए। इसके अलावा, कई मामलों में एक ही उत्तर पुस्तिका के भीतर अलग-अलग लिखावट पाई गई, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि किसी अन्य व्यक्ति ने उम्मीदवारों की ओर से उत्तर लिखे थे।
यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि एक अवैध प्रणाली के भीतर एक अवैध प्रक्रिया है जिसने हजारों योग्य उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
मूल्यांकन प्रक्रिया का विश्लेषण
नायडू ने मूल्यांकन के विभिन्न चरणों में हुई धांधली का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि हैदराबाद में डिजिटल मूल्यांकन के दौरान 97 मूल्यांकनकर्ता शामिल थे, जिनमें से 25 पूरी तरह से अनधिकृत थे। इसके बाद, दूसरे दौर के मूल्यांकन में भी 66 अनधिकृत लोगों को शामिल किया गया।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि राज्य की संस्थागत अखंडता के पतन का है। आमतौर पर, ऐसी परीक्षाओं का मूल्यांकन प्रोफेसरों और विभागाध्यक्षों द्वारा किया जाता है, लेकिन आरोप है कि यहाँ नियमों को दरकिनार कर केवल डिग्री लेक्चरर और अन्य कर्मचारियों का उपयोग किया गया।
| विशेषता | मानक प्रक्रिया | आरोपित प्रक्रिया (YSRCP शासन) |
|---|---|---|
| मूल्यांकनकर्ता | प्रोफेसर/विभागाध्यक्ष | ड्राइवर, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन |
| उत्तर पुस्तिका में बदलाव | न्यूनतम/नियमों के तहत | 97.82% में छेड़छाड़/ओवरराइटिंग |
| प्रमाणीकरण | परीक्षक के हस्ताक्षर अनिवार्य | हस्ताक्षर रहित सुधार पाए गए |
ऐतिहासिक रूप से, सरकारी परीक्षाओं की शुचिता राज्य की प्रशासनिक नींव होती है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह आंध्र प्रदेश के लोक सेवा आयोग (APPSC) के इतिहास का सबसे काला अध्याय होगा।
Frequently Asked Questions
1. नायडू ने किन विशिष्ट अनियमितताओं का उल्लेख किया है?
नायडू ने अनधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं (जैसे ड्राइवर और प्लंबर) की नियुक्ति और उत्तर पुस्तिकाओं में व्यापक छेड़छाड़ का उल्लेख किया है।
2. CFSL रिपोर्ट क्या संकेत देती है?
CFSL रिपोर्ट दर्शाती है कि लगभग 98% उत्तर पुस्तिकाओं में ओवरराइटिंग और अवैध बदलाव किए गए थे।