महाराष्ट्र सरकार ने नए 'बिजनेस रूल्स 2026' लागू किए हैं, जिसके तहत मुख्यमंत्री अब जनहित में किसी भी मंत्री के फैसले को पलट सकते हैं। यह कदम पुराने नियमों में बड़े बदलाव और न्यायिक फैसलों के बाद उठाया गया है।
- नए 'महाराष्ट्र सरकार बिजनेस रूल्स 2026' के तहत मुख्यमंत्री को मंत्रियों के निर्णयों को ओवरराइड करने की शक्ति दी गई है।
- यह शक्ति केवल 'जनहित' में और लिखित कारणों के साथ ही प्रयोग की जा सकती है।
- यह बदलाव 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें तत्कालीन सीएम के पास मंत्रियों के फैसलों को बदलने की शक्ति नहीं थी।
महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए नए महाराष्ट्र सरकार बिजनेस रूल्स, 2026 अधिसूचित किए हैं। इन नए नियमों के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अब यह विशेष अधिकार प्राप्त हो गया है कि वे किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय को सार्वजनिक हित में निरस्त या संशोधित कर सकते हैं।
यह संशोधन 1975 के पुराने नियमों को बदलकर लाया गया है। गौरतलब है कि तीन साल पहले, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के विभागीय निर्णयों की समीक्षा करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। नए नियम 13(5) के तहत, अब मुख्यमंत्री को वह कानूनी आधार प्रदान कर दिया गया है जिसकी कमी पहले महसूस की गई थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता के संतुलन को पूरी तरह से बदल सकता है। जहाँ पहले विभाग के मंत्री के पास अपने विभाग के कार्यों का अंतिम निर्णय लेने की शक्ति थी, वहीं अब मुख्यमंत्री की 'वीटो पावर' से निर्णय लेने की प्रक्रिया में केंद्रीकरण बढ़ेगा।
यह संशोधन मुख्यमंत्री के कार्यालय (CMO) को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करता है, जिससे कैबिनेट के भीतर शक्ति संतुलन बदल सकता है।
नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री न केवल निर्णयों को पलट सकते हैं, बल्कि वे किसी भी विभाग से दस्तावेज मांग सकते हैं। इसके अलावा, मुख्यमंत्री यह भी तय कर सकते हैं कि किन मामलों को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि मुख्यमंत्री किसी मामले को 'विशेष महत्व' का मानते हैं, तो उसे अनिवार्य रूप से कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
प्रशासनिक ढांचे में अन्य बड़े बदलाव
नए नियमों में मुख्य सचिव (Chief Secretary) की भूमिका को भी मजबूत किया गया है। यदि कोई प्रस्तावित निर्णय कानून या सरकारी नीति के विरुद्ध है, तो मुख्य सचिव मुख्यमंत्री या मंत्री को सलाह दे सकते हैं। साथ ही, वित्त विभाग को भी वित्तीय निर्णयों में 'गेटकीपिंग' की भूमिका दी गई है, जिससे राजस्व और खर्च से जुड़े मामलों में उनकी पूर्व सहमति अनिवार्य होगी।
Frequently Asked Questions
1. क्या मुख्यमंत्री किसी भी मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं?
नहीं, मुख्यमंत्री केवल 'जनहित' में और लिखित कारणों के साथ ही मंत्रियों के निर्णय को ओवरराइड कर सकते हैं। न्यायिक मामलों में यह शक्ति लागू नहीं होती।
2. पुराने नियमों और नए नियमों में मुख्य अंतर क्या है?
1975 के नियमों में मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के विभागीय निर्णयों को बदलने की स्पष्ट शक्ति नहीं थी, जिसे 2026 के नए नियमों में शामिल किया गया है।