दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाले में राघव चड्ढा की भूमिका पर उठते सवालों के बीच उनके समर्थकों ने कड़ा रुख अपनाया है। चड्ढा के खेमे का दावा है कि कथित अनियमितताएं उनके कार्यकाल समाप्त होने के सात महीने बाद हुईं।
- राघव चड्ढा के समर्थकों ने टेंडर घोटाले में उनकी संलिप्तता से पूरी तरह इनकार किया है।
- दावा किया गया है कि कथित घोटाला अक्टूबर 2022 में हुआ, जबकि चड्ढा का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था।
- AAP प्रवक्ता ने बीजेपी पर 'प्रतिशोध की राजनीति' करने का आरोप लगाया है।
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर घोटाले ने एक बार फिर दिल्ली की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद अब आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता राघव चड्ढा के नाम को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया है।
चड्ढा के खेमे का तर्क है कि उन्हें इस मामले में घसीटना केवल राजनीतिक ध्यान भटकाने का एक प्रयास है। उनके समर्थकों के अनुसार, राघव चड्ढा ने 2 मार्च, 2020 से 3 मार्च, 2022 तक दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। उन्होंने मार्च 2022 में दिल्ली विधानसभा के सदस्य (MLA) के पद से भी इस्तीफा दे दिया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस कथित घोटाले की जांच हो रही है, वह अक्टूबर 2022 का है, जो उनके कार्यकाल समाप्त होने के लगभग सात महीने बाद की घटना है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक वित्तीय घोटाला नहीं है, बल्कि यह दिल्ली की सत्ता संरचना और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। यदि चड्ढा का कार्यकाल वास्तव में घोटाले से पहले समाप्त हो गया था, तो उनके नाम का उपयोग करना जांच की दिशा को राजनीतिक रंग देने जैसा है।
'राजनीतिक आरोप और साक्ष्य के बीच एक महीन रेखा होती है, जिसे इस मामले में नजरअंदाज किया जा रहा है।'
AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने इस मुद्दे पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि यदि बीजेपी को राघव चड्ढा पर संदेह था, तो उन्होंने उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी 'प्रतिशोध की राजनीति' (Vendetta Politics) कर रही है और AAP नेतृत्व को डराने की कोशिश कर रही है।
दूसरी ओर, जांच एजेंसी की प्रेस विज्ञप्ति में तत्कालीन जल मंत्री, डीजेबी सीईओ, एक सलाहकार और मुख्य अभियंता के नामों का उल्लेख है, लेकिन राघव चड्ढा का नाम कहीं भी नहीं है। चड्ढा के समर्थकों का कहना है कि एजेंसी की रिपोर्ट में उनके किसी भी संदिग्ध रोल की पहचान नहीं की गई है, फिर भी राजनीतिक गलियारों में उनके नाम का शोर मचाया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. राघव चड्ढा का दिल्ली जल बोर्ड में कब तक कार्यकाल था?
राघव चड्ढा ने 3 मार्च, 2022 को दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया था।
2. दिल्ली जल बोर्ड घोटाला क्या है?
यह मामला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से संबंधित है, जिसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) कर रही है।
| विवरण | राघव चड्ढा का कार्यकाल | कथित घोटाले की अवधि |
|---|---|---|
| समय सीमा | मार्च 2020 - मार्च 2022 | अक्टूबर 2022 के आसपास |
| पद | उपायध्यक्ष (Vice-Chairman) | N/A |