राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों से पहले MGNREGA के स्थान पर लागू हुई नई VB-G RAM G योजना राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गई है। कांग्रेस और BAP इसे ग्रामीण रोजगार के लिए खतरा बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे विकास का नया मॉडल पेश कर रही है।

  • MGNREGA के स्थान पर नई VB-G RAM G योजना लागू की गई है।
  • कांग्रेस और BAP ने योजना के कार्यान्वयन और समय पर भुगतान को लेकर सवाल उठाए हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर आदिवासी इलाकों में पलायन बढ़ने की आशंका है।
  • सरपंचों ने ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता कम होने पर चिंता जताई है।

राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। आगामी पंचायत चुनावों से ठीक पहले, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम लागू कर दिया गया है। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ भी हैं जो राज्य की सत्ताधारी भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

अगले महीने होने वाले पंचायत चुनावों में, भाजपा इस नई योजना को एक 'बेहतर विकल्प' के रूप में पेश करने की तैयारी में है। योजना के तहत 125 दिनों के रोजगार का वादा किया गया है और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर अधिक जोर दिया गया है। हालांकि, इस बदलाव ने विपक्ष को हमला करने का एक बड़ा हथियार दे दिया है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि राजस्थान में लगभग 1.03 करोड़ सक्रिय श्रमिक इस योजना से जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का प्रशासनिक व्यवधान सीधे तौर पर ग्रामीण मतदाताओं के मूड को प्रभावित कर सकता है। यदि नई योजना का क्रियान्वयन सुचारू नहीं रहा, तो यह भाजपा के ग्रामीण वोट बैंक के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

नई योजना का राजनीतिक प्रभाव पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि जमीनी स्तर पर श्रमिकों को समय पर मजदूरी और काम मिलता है या नहीं।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि नई योजना में राज्य सरकार की जिम्मेदारी को सीमित कर दिया गया है, जिससे भुगतान में देरी होने की संभावना बढ़ गई है। विशेष रूप से दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में, जहां पलायन एक बड़ी समस्या है, इस योजना को लेकर भारी असंतोष देखा जा रहा है।

आदिवासी समुदायों की आवाज उठाते हुए, बंसवाड़ा के भारत आदिवासी पार्टी (BAP) सांसद राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि योजना लागू होने के बावजूद अभी तक किसी को एक भी दिन का रोजगार नहीं मिला है। इससे क्षेत्र में पलायन की दर में वृद्धि हुई है, जो आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

सरपंचों की बढ़ती चिंताएँ

केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी चिंतित हैं। दौसा के पापड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच अमित मीणा ने बताया कि विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की प्रतिपूर्ति (reimbursement) अभी तक लंबित है। इसके अलावा, नई योजना में ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता कम होने का डर है।

विशेषताMGNREGAVB-G RAM G
रोजगार के दिन100 दिन125 दिन
मुख्य ध्यानस्थानीय मांग और रोजगारबुनियादी ढांचा और जल सुरक्षा
निर्णय प्रक्रियाग्राम पंचायत केंद्रितउच्च स्तरीय योजना (PM Gati Shakti) केंद्रित

सरपंचों का तर्क है कि अब योजनाएं 'पीएम गति शक्ति' जैसे बड़े प्लान से जुड़ने के कारण स्थानीय जरूरतों के बजाय नौकरशाही के नियंत्रण में आ जाएंगी। एक भाजपा कार्यकर्ता और सरपंच ने भी नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि ग्रामीण इलाकों में इस नीति के प्रति नाराजगी है, जो चुनावों में भाजपा को महंगी पड़ सकती है।

Did You Know?: राजस्थान में MGNREGA के तहत काम करने वाले श्रमिकों में लगभग 23% आदिवासी समुदाय से आते हैं।

Frequently Asked Questions

1. VB-G RAM G क्या है?
यह MGNREGA का नया रूप है जो 125 दिनों के रोजगार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है।

2. राजस्थान में पंचायत चुनाव कब होंगे?
संभावित रूप से अगले महीने, हालांकि योजना परिवर्तन के कारण इसमें देरी हुई है।