कांग्रेस ने 2027 की जनगणना पद्धति पर केंद्र सरकार को घेरा है, आरोप लगाया है कि खुले प्रश्नों के माध्यम से ओबीसी आबादी को कम करके दिखाने की गहरी साजिश रची जा रही है।
- कांग्रेस ने 2027 की जनगणना में ओबीसी श्रेणी के नाम पर सवाल उठाए हैं।
- पार्टी का आरोप है कि 'ओपन-एंडेड' प्रश्न पद्धति से डेटा गलत हो सकता है।
- बिहार और तेलंगाना के सफल मॉडल के विपरीत, केंद्र ने ड्रॉप-डाउन सूची का उपयोग नहीं किया है।
- ओबीसी संगठनों ने भी डेटा की सटीकता पर चिंता जताई है।
भारत में आगामी 2027 की जनगणना को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की वास्तविक आबादी को कम करके दिखाने की कोशिश कर रही है। यह विवाद जनगणना प्रश्नावली में जाति दर्ज करने के तरीके को लेकर शुरू हुआ है।
विवाद की जड़: 'ओपन-एंडेड' प्रश्न बनाम ड्रॉप-डाउन सूची
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2027 की जनगणना में जाति पूछने के लिए एक तैयार सूची या ड्रॉप-डाउन मेनू के बजाय 'ओपन-एंडेड' (खुला) प्रश्न रखा गया है। कांग्रेस का तर्क है कि भारत में हजारों जातियां और उप-जातियां हैं, जिनके नाम क्षेत्र, भाषा और वर्तनी के अनुसार बदलते रहते हैं। ऐसे में, बिना किसी मानक सूची के, डेटा अविश्वसनीय हो सकता है।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों यह मुद्दा महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह लड़ाई केवल डेटा की नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति के संतुलन की है। यदि ओबीसी आबादी के सटीक आंकड़े सामने आते हैं, तो यह आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर प्रश्नावली से ओबीसी श्रेणी को अलग रखा है ताकि वास्तविक संख्या को छिपाया जा सके।
केंद्र ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में खुद माना था कि ड्रॉप-डाउन मेनू डेटा को अधिक सुसंगत बना सकता है, फिर 2027 में इसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा?
यह विवाद केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है। ऑल इंडिया ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी इस पद्धति की आलोचना की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने पहले ही सटीक डेटा के लिए पूर्व-निर्धारित जाति सूचियों और कोडों का उपयोग किया है, जो एक बेहतर मॉडल साबित हुआ है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में जाति आधारित जनगणना का मुद्दा दशकों पुराना है। 2011 के सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के डेटा के उपयोग को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। अब 2027 में, पहली बार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य जातियों को राष्ट्रीय स्तर पर गिना जाना है, जिससे stakes बहुत बढ़ गए हैं।
| विशेषता | कांग्रेस का प्रस्तावित मॉडल | सरकार का वर्तमान मॉडल (2027) |
|---|---|---|
| जाति दर्ज करने का तरीका | ड्रॉप-डाउन मेनू / पूर्व-निर्धारित सूची | ओपन-एंडेड प्रश्न (लिखकर बताना) |
| डेटा सटीकता | उच्च (मानकीकृत) | कम (वर्तनी और क्षेत्रीय अंतर के कारण) |
| उदाहरण राज्य | बिहार, तेलंगाना | राष्ट्रीय स्तर पर लागू |
Frequently Asked Questions
1. कांग्रेस का मुख्य आरोप क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर ऐसी पद्धति अपना रही है जिससे ओबीसी आबादी के आंकड़े कम आएं।
2. 'ओपन-एंडेड' प्रश्न का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि जनगणना अधिकारी व्यक्ति से उसकी जाति पूछेगा और वह जो भी नाम बताएगा, उसे वैसा ही लिख लिया जाएगा, बिना किसी मानक सूची के।