महाराष्ट्र सरकार ने रिहा हुए कैदियों के पुनर्वास के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता को दोगुना कर दिया है। अब यह राशि 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है, जिससे उन्हें नया जीवन शुरू करने में मदद मिलेगी।

  • महाराष्ट्र सरकार ने पुनर्वास अनुदान को ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 किया।
  • अब वे लोग भी लाभ उठा सकेंगे जिन्हें एक साल जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया है।
  • इस राशि का उपयोग सिलाई मशीन, लैपटॉप या पोल्ट्री फार्म जैसे छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए किया जा सकता है।

महाराष्ट्र सरकार ने समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने वाले पूर्व कैदियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी एक नए सरकारी प्रस्ताव (GR) के अनुसार, रिहा हुए कैदियों को मिलने वाली एकमुश्त सहायता राशि को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है। यह निर्णय उन लोगों के लिए जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है जो जेल से बाहर आने के बाद सामाजिक कलंक और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।

इस नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पहली बार, उन व्यक्तियों को भी इस योजना के दायरे में लाया गया है जिन्हें हिरासत में कम से कम एक वर्ष बिताने के बाद बरी (Acquitted) कर दिया गया है। पहले यह लाभ केवल सजायाफ्ता कैदियों और प्रोबेशन के तहत आने वाले लोगों तक ही सीमित था। यह बदलाव न्याय प्रणाली में एक मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that rehabilitation is the most critical phase in reducing recidivism (re-offending). By providing seed capital, the state is not just giving money, but investing in the social reintegration of individuals. This move shifts the focus from mere punishment to constructive reformation.

यह योजना समाज के प्रति राज्य की उस जिम्मेदारी को स्वीकार करती है, जो उन लोगों के पुनर्वास के लिए आवश्यक है जो रोजगार पाने में सामाजिक बाधाओं का सामना करते हैं।

इस योजना का इतिहास काफी पुराना है। 1993 में यह मात्र 1,000 रुपये से शुरू हुई थी। समय के साथ इसमें सुधार हुआ—2002 में यह 5,000 रुपये हुई और 2016 में 25,000 रुपये। अब 2026 में, यह राशि 50,000 रुपये तक पहुंच गई है। लाभार्थियों ने बताया कि इस पैसे से वे सिलाई मशीन, बढ़ईगीरी के औजार, पोल्ट्री फार्म के लिए मुर्गियां या सेकंड हैंड लैपटॉप खरीद सकते हैं।

मुंबई के एक 44 वर्षीय व्यक्ति की कहानी प्रेरणादायक है। हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, उन्होंने जेल के भीतर ही अपनी शिक्षा जारी रखी और मास्टर डिग्री हासिल की। रिहा होने के बाद, इस अनुदान और थोड़े से कर्ज की मदद से उन्होंने एक पुराना लैपटॉप खरीदा और आज वे एक निजी फर्म में कानूनी सहायक (Legal Assistant) के रूप में काम कर रहे हैं।

Did You Know?: महाराष्ट्र उन चुनिंदा राज्यों में से एक है जिसके पास रिहा हुए कैदियों के पुनर्वास के लिए इस तरह की समर्पित योजना है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस अनुदान के लिए कौन पात्र है?
उत्तर: 18 से 65 वर्ष की आयु के लोग, जिनमें सजायाफ्ता कैदी और कम से कम एक वर्ष जेल में रहने के बाद बरी हुए व्यक्ति शामिल हैं।

प्रश्न 2: आवेदन कैसे करें?
उत्तर: आवेदकों को प्रोबेशन अधिकारी के माध्यम से एक प्रस्ताव जमा करना होता है, जिसमें प्रस्तावित व्यवसाय और आवश्यक वस्तुओं का विवरण शामिल होता है।