कांग्रेस नेता एम. लक्ष्मण ने मैसूर में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने के खिलाफ क्षेत्रीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रशासन पर गरीबों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है।

  • कांग्रेस नेता एम. लक्ष्मण ने मैसूर नगर निगम (MCC) के निष्कासन अभियान का विरोध किया।
  • वेंडर्स का तर्क है कि उन्हें व्यवसाय के लिए वैकल्पिक स्थान नहीं दिया जा रहा है।
  • प्रशासन पर शक्तिशाली लोगों और गरीबों के बीच भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया गया है।

कर्नाटक के मैसूर में नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता एम. लक्ष्मण ने शुक्रवार को स्ट्रीट वेंडर्स के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए क्षेत्रीय आयुक्त और मैसूर नगर निगम के प्रशासक नितेश पाटिल को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में शहर के विभिन्न हिस्सों से रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हटाने का कड़ा विरोध किया गया है।

एम. लक्ष्मण ने विशेष रूप से सय्याजी राव रोड, डफरिन क्लॉक टॉवर के पास और ओल्ड ओलंपिया टॉकीज रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये गरीब विक्रेता वर्षों से फल, सब्जी और कपड़े बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। वेंडर्स का दावा है कि वे इस तरह से अपना काम करते हैं जिससे आम जनता को कोई असुविधा नहीं होती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी विकास और आजीविका के अधिकार के बीच का यह संघर्ष भारत के कई बड़े शहरों में एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बन रहा है। जब नगर निगम केवल छोटे विक्रेताओं को निशाना बनाते हैं और बड़े स्थायी अतिक्रमणों को छोड़ देते हैं, तो इससे सामाजिक असमानता बढ़ती है।

"प्रशासन का रवैया गरीबों के प्रति भेदभावपूर्ण है; एक नियम शक्तिशाली लोगों के लिए और दूसरा गरीबों के लिए होना न्यायसंगत नहीं है।"

लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार स्थायी संरचनाओं को हटाना आवश्यक है, तो उनका विरोध नहीं है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन केवल उन गरीब विक्रेताओं को निशाना क्यों बना रहा है जो दिन में केवल दो-तीन घंटे के लिए टोकरियों में सामान बेचते हैं। उन्होंने मांग की कि फुटपाथों का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए कि पैदल चलने वालों के लिए भी पर्याप्त जगह रहे, जैसा कि अन्य शहरों में किया जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वाले) को 'स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014' के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि वेंडर्स को बिना किसी उचित सर्वेक्षण और पुनर्वास योजना के हटाया न जाए। मैसूर की वर्तमान स्थिति इस कानून के कार्यान्वयन पर बड़े सवाल खड़े करती है।

Did You Know?: भारत में करोड़ों लोग अपनी आजीविका के लिए अनौपचारिक क्षेत्र और स्ट्रीट वेंडिंग पर निर्भर हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कांग्रेस नेता ने क्या मांग की है?
उत्तर: उन्होंने मांग की है कि वेंडर्स को हटाने से पहले उन्हें व्यवसाय करने के लिए वैकल्पिक स्थान प्रदान किया जाए।

प्रश्न 2: वेंडर्स का मुख्य तर्क क्या है?
उत्तर: उनका तर्क है कि वे पैदल यात्रियों को बाधित नहीं करते और प्रशासन केवल गरीबों को निशाना बना रहा है।