द्रविड़ कड़गम के नेता के. वीरमणि ने कहा कि पेरियार ने सामाजिक न्याय और महिलाओं के उत्थान में बड़ी सफलता प्राप्त की है, लेकिन NEET और EWS आरक्षण जैसी नीतियों ने वंचितों के अधिकारों को फिर से खतरे में डाल दिया है।
- पेरियार ने सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों के लिए ऐतिहासिक कार्य किया।
- NEET और EWS आरक्षण को वंचित वर्गों के लिए बाधा बताया गया।
- द्रविड़ कड़गम का लक्ष्य केवल सामाजिक सुधार है, राजनीतिक सत्ता नहीं।
मदुराई में आयोजित एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए, द्रविड़ कड़गम (DK) के नेता के. वीरमणि ने कहा कि द्रविड़ आंदोलन के जनक पेरियार ने सामाजिक रूप से उत्पीड़ित वर्गों, विशेष रूप से महिलाओं के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आज के दौर में सामाजिक समानता की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।
वीरमणि ने वर्तमान नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि NEET परीक्षा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं उन वर्गों की शिक्षा और अधिकारों को छीन रही हैं, जिन्हें पेरियार ने सशक्त बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार आरएसएस की विचारधारा को आगे बढ़ा रही है, जिससे वंचित वर्गों की पहुंच शिक्षा से दूर हो रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिण भारत में सामाजिक न्याय और आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। पेरियार के सिद्धांतों और आधुनिक शिक्षा नीतियों के बीच का यह टकराव आने वाले चुनावों में एक बड़ा विमर्श बन सकता है।
पेरियार ने दमनकारी विचारों को मिटाया, लेकिन आधुनिक नीतियां उन अधिकारों को फिर से चुनौती दे रही हैं जिन्हें दशकों के संघर्ष से हासिल किया गया था।
वीरमणि ने 1946 की मदुरै द्रविड़ कड़गम सम्मेलन की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उस समय आंदोलन के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए थे, लेकिन पेरियार ने भीड़ को हिंसा करने से रोका और विचारधारा के प्रति धैर्य रखने की सीख दी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को देश भर में शिक्षा और रोजगार में जो आरक्षण मिला है, वह पेरियार द्वारा दिखाए गए मार्ग का ही परिणाम है। उन्होंने महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार दिलाने में भी पेरियार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
द्रविड़ आंदोलन का उद्देश्य जातिवाद, धार्मिक कट्टरता और पितृसत्ता को समाप्त करना था। पेरियार ई.वी. रामास्वामी ने दक्षिण भारत में एक ऐसी चेतना जागृत की जिसने सामाजिक संरचना को बदलने का काम किया।
Frequently Asked Questions
1. के. वीरमणि ने किन नीतियों की आलोचना की?
उन्होंने NEET परीक्षा और EWS आरक्षण की आलोचना की है।
2. पेरियार का मुख्य योगदान क्या था?
पेरियार ने सामाजिक न्याय, जातिवाद के उन्मूलन और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।