पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने योग गुरु बाबा रामदेव पर तीखा हमला बोलते हुए उनके 'स्वदेशी' अभियान को नकली और विदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाला बताया है। सिंह ने रामदेव को सीधे चुनौती देते हुए उन्हें 'मर्दों की तरह' खुलकर मुकाबला करने की नसीहत दी है।

  • बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड पर स्वदेशी के नाम पर नकली और विदेशी सामान बेचने का गंभीर आरोप लगाया।
  • पूर्व भाजपा सांसद ने योग गुरु को आंदोलन करने के बजाय "मर्दों की तरह" खुलकर निर्णायक लड़ाई लड़ने की चुनौती दी।
  • दोनों दिग्गजों के बीच यह विवाद 2022 से पतंजलि नाम के उपयोग और महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के समय से लगातार गहराता जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक कॉलेज के कार्यक्रम के दौरान पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने योग गुरु बाबा रामदेव पर चौतरफा हमला बोला। सिंह ने रामदेव के बहुचर्चित 'स्वदेशी' अभियान की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पतंजलि के स्वदेशी दावों के पीछे अब मिलावटी और विदेशी सामान बेचा जा रहा है। उन्होंने रामदेव को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि वे कोई नया आंदोलन शुरू करना चाहते हैं, तो उन्हें पुरुषों की तरह मैदान में उतरना चाहिए।

विदेशी उत्पादों और मिलावटी घी का गंभीर आरोप

बृजभूषण शरण सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि रामदेव ने शुरुआत में स्वदेशी के नाम पर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था, जो उस समय काफी हद तक सही भी था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। सिंह ने दावा किया कि रामदेव अब विदेशी अंडरगारमेंट्स तक बनाने लगे हैं। इसके अलावा, उन्होंने देश में मिलावटी घी की बढ़ती समस्या के लिए सीधे तौर पर बाबा रामदेव को जिम्मेदार ठहराया।

'सलवार और सिंदूर' वाले अतीत पर तीखा तंज

रामदेव के पुराने आंदोलनों का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने उन पर व्यक्तिगत हमला भी किया। उन्होंने कहा कि इस बार रामदेव को स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए कि वे विरोध प्रदर्शन के दौरान 'सलवार' और 'सिंदूर' पहनकर न भागें। सिंह का इशारा साल 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में पुलिस कार्रवाई के दौरान रामदेव के महिलाओं के कपड़े पहनकर भागने की घटना की ओर था। उन्होंने कहा कि रामदेव को एक मर्द की तरह सामने आकर निर्णायक लड़ाई लड़नी चाहिए।

Why This Matters

बोझोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण से पता चलता है कि यह सार्वजनिक विवाद केवल दो प्रभावशाली हस्तियों की आपसी रंजिश नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के स्थानीय राजनीतिक दिग्गजों और देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट-आध्यात्मिक साम्राज्यों के बीच वर्चस्व की गहरी जंग को दर्शाता है। 'स्वदेशी' और 'राष्ट्रवाद' के प्रतीकों पर नियंत्रण हासिल करने की यह कोशिश आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है।

विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बृजभूषण शरण सिंह और बाबा रामदेव के बीच कड़वाहट 2022 से जारी है। तब सिंह ने मांग की थी कि रामदेव और पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण अपने ब्रांड के लिए 'पतंजलि' नाम का उपयोग बंद करें। सिंह का तर्क था कि इन लोगों ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि के विकास के लिए कुछ नहीं किया। इसके बाद 2023 में, जब महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए, तब बाबा रामदेव ने पहलवानों का समर्थन करते हुए सिंह की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी।

"यह टकराव केवल व्यक्तिगत रंजिश तक सीमित नहीं है; यह सांस्कृतिक प्रतीकों पर नैतिक अधिकार और क्षेत्रीय राजनीतिक प्रभाव की एक बड़ी जंग है।" - बोझोकमीडिया राजनीतिक विश्लेषक।
मुद्दाबृजभूषण शरण सिंह का पक्षबाबा रामदेव / पतंजलि का पक्ष
पतंजलि नाम का उपयोगगोंडा (महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि) के लिए कोई योगदान नहीं दिया गया।पतंजलि ब्रांड भारतीय संस्कृति और योग परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।
स्वदेशी अभियानस्वदेशी के नाम पर नकली घी और विदेशी उत्पाद बेचे जा रहे हैं।सस्ती और शुद्ध स्वदेशी वस्तुएं जन-जन तक पहुंचाई जा रही हैं।
पहलवानों का विवादआरोप राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद हैं।महिला पहलवानों के आरोपों की निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी होनी चाहिए।
क्या आप जानते हैं?: योग सूत्रों के संकलनकर्ता महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला माना जाता है, जो कि बृजभूषण शरण सिंह का गृह क्षेत्र और मजबूत राजनीतिक गढ़ है।

Frequently Asked Questions

1. बृजभूषण शरण सिंह और बाबा रामदेव के बीच मुख्य विवाद क्या है?
दोनों के बीच मुख्य विवाद 'पतंजलि' नाम के उपयोग, गोंडा जिले के विकास और 2023 में महिला पहलवानों के आंदोलन के दौरान रामदेव द्वारा बृजभूषण के विरोध को लेकर है।

2. बृजभूषण ने 'सलवार और सिंदूर' का संदर्भ क्यों दिया?
यह संदर्भ साल 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए आंदोलन के दौरान बाबा रामदेव के पुलिस से बचने के लिए महिला के वेश (सलवार-सूट) में भागने की घटना से जुड़ा है।