कांग्रेस नेता रमेश बाबू ने बेंगलुरु के कृष्णराजपुरम में ITI की 44 एकड़ बेशकीमती जमीन की ई-नीलामी को रोकने के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने इस भूमि को निजी डेवलपर्स को बेचने के बजाय सार्वजनिक क्षेत्र के विकास के लिए उपयोग करने की मांग की है।

  • कांग्रेस ने बेंगलुरु के कृष्णराजपुरम में 44.03 एकड़ ITI भूमि की प्रस्तावित ई-नीलामी को रद्द करने की मांग की है।
  • भूमि का आरक्षित मूल्य ₹1,685.40 करोड़ निर्धारित किया गया है।
  • कांग्रेस का तर्क है कि यह भूमि 1948 में सार्वजनिक उद्देश्य और रोजगार के लिए रियायती दरों पर आवंटित की गई थी।
  • मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा राज्य सरकार द्वारा आवंटित भूमि की नीलामी का कड़ा विरोध किया है।

बेंगलुरु के कृष्णराजपुरम में स्थित इंडियन टेलीफोन्स इंडस्ट्रीज (ITI) की 44.03 एकड़ भूमि की प्रस्तावित ई-नीलामी ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व कांग्रेस एमएलसी और केपीसीसी मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष रमेश बाबू ने केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रतिनिधित्व भेजकर इस नीलामी को तत्काल प्रभाव से रोकने या स्थगित करने की मांग की है।

विवाद की जड़ में केंद्र सरकार का 'एसेट मोनेटाइजेशन प्रोग्राम' (Asset Monetization Programme) है, जिसके तहत नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) ने इस प्राइम लैंड के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इस भूमि का आरक्षित मूल्य लगभग ₹1,685.40 करोड़ आंका गया है। नीलामी की प्रक्रिया के तहत तकनीकी बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर निर्धारित की गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विवाद का कारण

रमेश बाबू ने अपने तर्क में स्पष्ट किया कि यह भूमि मूल रूप से 1948 में तत्कालीन मैसूर सरकार द्वारा ITI की स्थापना और रोजगार सृजन के सार्वजनिक उद्देश्य के लिए निःशुल्क या रियायती दरों पर आवंटित की गई थी। कांग्रेस का तर्क है कि इतने महत्वपूर्ण सार्वजनिक उद्देश्य के लिए दी गई भूमि को अब निजी डेवलपर्स को बेचना उस मूल मंशा के विरुद्ध है।

इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाया गया है कि इस भूमि के कुछ हिस्से 'करब' (karab) भूमि के रूप में वर्गीकृत हैं, जो सरकारी भूमि की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ITI के पास इन विशिष्ट हिस्सों के मुद्रीकरण (monetisation) का कानूनी अधिकार है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल भूमि की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य बनाम केंद्र के अधिकारों और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यदि यह भूमि निजी हाथों में जाती है, तो बेंगलुरु के महत्वपूर्ण औद्योगिक और कौशल विकास क्षेत्रों में कमी आ सकती है।

सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा राज्य सरकार द्वारा आवंटित भूमि की नीलामी संसाधनों का दुरुपयोग है।

हाल ही में, ITI ने कृष्णराजपुरम में ही 21 एकड़ भूमि को केंद्रीय जीएसटी विभाग को ₹914.31 करोड़ में बेचा था। इस घटनाक्रम के बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे 'संसाधनों का दुरुपयोग' करार दिया था।

Did You Know?: बेंगलुरु के कृष्णराजपुरम क्षेत्र में स्थित यह भूमि ओल्ड मद्रास रोड और नेशनल हाईवे 75 के पास स्थित होने के कारण अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखती है।

Frequently Asked Questions

1. कांग्रेस इस भूमि की नीलामी क्यों रोकना चाहती है?
कांग्रेस का मानना है कि यह भूमि रोजगार और कौशल विकास जैसे सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए आरक्षित होनी चाहिए, न कि निजी लाभ के लिए।

2. नीलामी की प्रक्रिया कौन संचालित कर रहा है?
यह नीलामी नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) द्वारा ITI की ओर से आयोजित की जा रही है।