पश्चिम बंगाल की भाजपा विधायक सारबरी मुखर्जी ने जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र समूहों के बीच हुई हिंसा में एबीवीपी कार्यकर्ताओं को उकसाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे घटना के समय कैंपस में मौजूद भी नहीं थीं।

  • भाजपा विधायक सारबरी मुखर्जी ने कैंपस में हिंसा भड़काने के आरोपों का खंडन किया।
  • विधायक के अनुसार, वे घटना के समय जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद नहीं थीं।
  • भाजपा ने स्पष्ट किया है कि एबीवीपी आधिकारिक तौर पर भाजपा का छात्र संगठन नहीं है।
  • हिंसा वामपंथी समूहों और एबीवीपी के बीच हुई, जिसमें कई छात्र घायल हुए।

कोलकाता के प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई हिंसक झड़प ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पश्चिम बंगाल की भाजपा विधायक सारबरी मुखर्जी ने उन गंभीर आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने आरएसएस से संबद्ध एबीवीपी (ABVP) के प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया था।

घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार तड़के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संकाय के छात्रों के संघ की एक सामान्य बैठक के बाद हिंसा भड़क उठी। यह संघर्ष वामपंथी छात्र समूहों और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के बीच हुआ, जिसके परिणामस्वरूप परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई छात्र घायल हो गए।

क्या था पूरा विवाद?

आरोप लगाने वालों का दावा था कि विधायक की उपस्थिति या उनके बयानों ने प्रदर्शनकारियों को उग्र बनाया। हालांकि, सारबरी मुखर्जी ने इन दावों को आधारहीन बताया है। उन्होंने कहा, "मैं कैंपस में कैसे प्रवेश कर सकती हूँ? मैं वहां मौजूद भी नहीं थी। मैं केवल कुछ भाजपा युवाओं के साथ जादवपुर पुलिस स्टेशन के पास एक शांतिपूर्ण सभा में शामिल हुई थी और उसके बाद वहां से चली गई थी।"

विधायक ने आगे कहा कि सीसीटीवी फुटेज यह साबित कर देगा कि उनकी वहां कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने वामपंथी छात्र संगठनों, विशेष रूप से एसएफआई (SFI) और आरएसएफ (RSF) पर आरोप लगाया कि उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को कैंपस में घुसने के लिए उकसाया था।

बीजेपी की आधिकारिक स्थिति

इस विवाद के बीच, पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने भी एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एबीवीपी भाजपा का छात्र संगठन नहीं है। भट्टाचार्य के अनुसार, "एबीवीपी एक राष्ट्रवादी छात्र निकाय है जो स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और यह भाजपा की शाखा संस्था नहीं है।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जादवपुर विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक ध्रुवीकरण न केवल छात्रों की सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि राज्य के राजनीतिक वातावरण को भी अस्थिर करता है। इस तरह की झड़पें अक्सर कैंपस की स्वायत्तता और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच संघर्ष को दर्शाती हैं।

राजनीतिक नेताओं की कैंपस में मौजूदगी और छात्र संगठनों के बीच का यह टकराव शैक्षणिक माहौल को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
Did You Know?: जादवपुर विश्वविद्यालय भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है, जो अपने सक्रिय छात्र राजनीति के लिए भी जाना जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: जादवपुर विश्वविद्यालय में हिंसा किसके बीच हुई?
उत्तर: यह झड़प आरएसएस से संबद्ध एबीवीपी और वामपंथी छात्र समूहों के बीच हुई।

प्रश्न 2: क्या भाजपा ने एबीवीपी के साथ अपना संबंध स्वीकार किया है?
उत्तर: नहीं, पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि एबीवीपी भाजपा का आधिकारिक छात्र संगठन नहीं है।