विराजपेट के विधायक और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव ए.एस. पोन्नाना ने कस्तूरीरंगन ड्राफ्ट का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यदि यह रिपोर्ट खेती और स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रतिबंध लगाती है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- ए.एस. पोन्नाना ने कस्तूरीरंगन ड्राफ्ट के कृषि संबंधी प्रतिबंधों का विरोध किया है।
- उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका दोनों का संतुलन जरूरी है।
- खनन और रिसॉर्ट्स पर रोक का समर्थन, लेकिन कृषि कार्यों पर प्रतिबंध का विरोध।
- कोडागु में सड़क विकास और अस्पताल उन्नयन पर भी चर्चा की गई।
कर्नाटक के कोडागु क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और कृषि अधिकारों के बीच संघर्ष गहरा गया है। विराजपेट के विधायक और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव ए.एस. पोन्नाना ने हाल ही में स्पष्ट किया कि कस्तूरीरंगन ड्राफ्ट अधिसूचना को उसके वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उनका मुख्य तर्क यह है कि यदि यह रिपोर्ट कृषि गतिविधियों पर सीमाएं लगाती है, तो इससे कोडागु के निवासियों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
मडिकेरी में कोडागु जिला कार्यरत पत्रकार संघ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, पोन्नाना ने कहा कि पश्चिमी घाट का संरक्षण देश के पारिस्थितिक संतुलन के लिए अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण की रक्षा और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा साथ-साथ चलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें रिपोर्ट के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने के बजाय इसके तथ्यों को समझने की आवश्यकता है।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the implementation of the Kasturirangan report has long been a flashpoint in Southern India. The tension lies in the delicate balance between preserving the biodiversity of the Western Ghats and maintaining the socio-economic stability of the agrarian communities living within these zones. Any heavy-handed regulation could trigger massive agrarian unrest in the region.
पर्यावरण की रक्षा और किसानों के अधिकार एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक होने चाहिए।
पोन्नाना ने विशिष्ट रूप से कहा कि उन्हें खनन, उत्खनन और विलासितापूर्ण रिसॉर्ट्स पर प्रतिबंध लगाने से कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने कृषि संबंधी कार्यों, जैसे कि कुएं खोदने और पेड़ काटने पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वन विभाग के मौजूदा प्रतिबंधों के कारण ग्रामीण पहले से ही कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
इसके अलावा, उन्होंने कोडागु में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी बात की। उन्होंने बताया कि विराजेपेट-मडिकेरी और नापोकलु सड़कों की मरम्मत के लिए निविदाएं जारी की जा चुकी हैं और विराजेपेट सड़क के लिए ₹40 करोड़ आवंटित किए गए हैं। उन्होंने अस्पताल के उन्नयन और बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कस्तूरीरंगन समिति का गठन पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) की पहचान करने के लिए किया गया था। इस रिपोर्ट के लागू होने से कृषि, बुनियादी ढांचे और स्थानीय समुदायों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिसके कारण कर्नाटक सरकार ने पहले भी कई बार इस रिपोर्ट को खारिज किया है।
Frequently Asked Questions
1. ए.एस. पोन्नाना कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का विरोध क्यों कर रहे हैं?
क्योंकि उन्हें डर है कि यह कृषि गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाकर स्थानीय किसानों की आजीविका को खतरे में डाल सकती है।
2. पोन्नाना किन प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं?
वे खनन, उत्खनन और बड़े विलासितापूर्ण रिसॉर्ट्स के निर्माण पर प्रतिबंध का समर्थन करते हैं।