महाराष्ट्र सरकार ने सत्ताधारी महायुति गठबंधन के नेताओं से जुड़ी दो सहकारी चीनी मिलों के लिए 335.32 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दे दी है। बीजेपी विधायक से जुड़ी एक मिल को 18 करोड़ रुपये का ऋण दिए जाने के विवाद के ठीक बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
- महायुति नेताओं विनय कोरे और घुले पाटिल परिवार से जुड़ी दो चीनी मिलों को 335.32 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
- सहकारी बैंकों द्वारा ऋण देने में कड़ाई बरतने के बीच यह फंडिंग राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के माध्यम से दी जा रही है।
- यह निर्णय हाल ही में एक अन्य भाजपा विधायक की चीनी मिल को दिए गए 18 करोड़ रुपये के राज्य-समर्थित ऋण पर हुए विवाद के बाद आया है।
महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज करते हुए, राज्य सरकार ने दो सहकारी चीनी मिलों के लिए कुल 335.32 करोड़ रुपये के भारी-भरकम ऋण को मंजूरी दी है। ये दोनों कारखाने सत्ताधारी महायुति गठबंधन के प्रमुख नेताओं से जुड़े हुए हैं। यह वित्तीय सहायता ऐसे समय में आई है जब कुछ ही सप्ताह पहले भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार से जुड़ी एक चीनी मिल को "विशेष मामले" के तहत 18 करोड़ रुपये का ऋण दिए जाने पर कड़ा विरोध हुआ था।
नए स्वीकृत ऋणों को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के माध्यम से भेजा जा रहा है। इस वित्तीय सहायता का समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि गन्ने की पेराई का सीजन अक्टूबर-नवंबर में शुरू होने वाला है। वर्तमान में, महाराष्ट्र में सहकारी बैंकों ने ऋण देने के नियमों को काफी कड़ा कर दिया है और राज्य सरकार की गारंटी के बिना डिफॉल्टर मिलों को नया ऋण देने से इनकार कर रहे हैं।
सहकारी बैंकों की सख्ती और सरकारी बाईपास
नई मंजूरी के तहत, जन सुराज्य शक्ति पार्टी के विधायक विनय कोरे (जो महायुति के सहयोगी हैं) से जुड़े तात्यासाहेब कोरे वारणा सहकारी चीनी कारखाने को 160.37 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। राज्य के सहकारिता विभाग ने मिल को निर्देश दिया है कि वह इस राशि का उपयोग कोल्हापुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के बकाया ऋणों को चुकाने और दो साल के भीतर NCDC ऋण वापस करने के लिए करे।
इसी तरह, अहिल्यानगर जिले के नेवासा में स्थित लोकनेते मारुतराव घुले पाटिल ज्ञानेश्वर सहकारी चीनी कारखाने को 174.95 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस मिल को भी अपनी बकाया देनदारियों को निपटाने के लिए इस राशि का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। इन ऋणों को मंजूरी देकर, राज्य सरकार ने पारंपरिक सहकारी बैंकिंग प्रणाली को दरकिनार कर दिया है, जो डिफॉल्टर मिलों के प्रति सख्त रुख अपना रही थी।
Historical Background
चीनी सहकारी समितियां ऐतिहासिक रूप से ग्रामीण महाराष्ट्र की वित्तीय और राजनीतिक रीढ़ रही हैं। इन मिलों पर नियंत्रण का सीधा मतलब स्थानीय कृषि मतदाता आधार पर मजबूत राजनीतिक प्रभाव होता है। पिछले कुछ दशकों में, परिचालन अक्षमताओं, वैश्विक चीनी कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुप्रबंधन के कारण इनमें से कई मिलों पर भारी कर्ज जमा हो गया है। नतीजतन, महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) और जिला सहकारी बैंकों ने नई पूंजी जारी करने से पहले सरकारी गारंटी की मांग शुरू कर दी है, जिसने चीनी क्षेत्र को एक बड़े राजनीतिक रणक्षेत्र में बदल दिया है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि महत्वपूर्ण चुनावों से ठीक पहले चीनी सहकारी समितियों को राज्य-समर्थित ऋण देना ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक समर्थन को मजबूत करने का एक पुराना और परखा हुआ तरीका है। इन फंडों को सुरक्षित करके, सत्ताधारी महायुति गठबंधन यह सुनिश्चित करता है कि प्रभावशाली स्थानीय नेता सहकारी नेटवर्क पर अपनी पकड़ बनाए रखें, जो सीधे तौर पर गन्ना किसानों और स्थानीय रोजगार को प्रभावित करता है। हालांकि, यह वित्तीय जिम्मेदारी और राज्य के संसाधनों के निष्पक्ष वितरण पर गंभीर सवाल उठाता है।
"महाराष्ट्र में चीनी राजनीति और राज्य-समर्थित वित्तपोषण का गठजोड़ यह दर्शाता है कि कैसे बड़े चुनावों से पहले ग्रामीण वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए वित्तीय बेलआउट का अक्सर राजनीतिक हथियारों के रूप में उपयोग किया जाता है।"
| चीनी कारखाने का नाम | संबद्ध नेता / पार्टी | स्वीकृत राशि | ऋण का उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| तात्यासाहेब कोरे वारणा मिल | विधायक विनय कोरे (महायुति सहयोगी) | ₹160.37 करोड़ | कोल्हापुर जिला सहकारी बैंक का बकाया चुकाना |
| लोकनेते मारुतराव घुले पाटिल ज्ञानेश्वर मिल | घुले पाटिल परिवार (महायुति) | ₹174.95 करोड़ | बकाया बैंक ऋणों का निपटान करना |
| नीलकंठेश्वर सहकारी मिल (पिछला विवाद) | विधायक अभिमन्यु पवार (भाजपा) | ₹18.00 करोड़ | परिचालन पूंजी / ऋण का निपटान |
Frequently Asked Questions
1. सरकार इन ऋणों को NCDC के माध्यम से क्यों भेज रही है?
चूंकि स्थानीय सहकारी बैंकों ने राज्य की गारंटी के बिना डिफॉल्टर चीनी मिलों को नया ऋण देने से इनकार कर दिया है, इसलिए सरकार इन मिलों को वित्तीय सहायता पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) का उपयोग कर रही है।
2. विपक्ष इन ऋण मंजूरियों की आलोचना क्यों कर रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी महायुति सरकार चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए अपने ही गठबंधन के नेताओं द्वारा संचालित चीनी सहकारी मिलों को बचाने के लिए सार्वजनिक धन और सरकारी गारंटी का चुनिंदा रूप से उपयोग कर रही है।