कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वन्दे मातरम् के गायन को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा तय किए गए संस्करण को गाना देशद्रोह है?

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने वन्दे मातरम् के दो छंदों के गायन का बचाव किया।
  • उन्होंने कहा कि 1937 में गांधी, नेहरू और पटेल जैसे नेताओं ने यह संस्करण तय किया था।
  • खड़गे ने भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को वन्दे मातरम् विवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। कर्नाटक के कलबुर्गी में मीडिया से बात करते हुए, खड़गे ने केंद्र सरकार के उस आरोप को खारिज कर दिया जिसमें कांग्रेस की स्थिति को 'राष्ट्रविरोधी' और 'तुष्टीकरण की राजनीति' बताया गया था।

खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और उसका सेवा दल दशकों से वन्दे मातरम् के पहले दो छंदों का ही गायन करता आ रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान राष्ट्रीय नेताओं ने मिलकर वन्दे मातरम् के इस संक्षिप्त संस्करण पर सहमति जताई थी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this dispute is not merely about a hymn but is a deeper ideological battle over how India's national identity and freedom struggle are interpreted. By questioning the patriotism of the Congress, the ruling dispensation is tapping into a potent tool of political polarization.

यदि हम उन नियमों का पालन कर रहे हैं जो हमारे राष्ट्र नायकों ने तय किए थे, तो क्या हम देशद्रोही हो गए?

खड़गे ने इस मुद्दे की तुलना राष्ट्रगान 'जन गण मन' से भी की। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह हम राष्ट्रगान के सभी पांच छंद नहीं गाते, उसी तरह वन्दे मातरम् के भी संक्षिप्त संस्करण का उपयोग करना गलत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमित शाह इतने वर्षों तक गृह मंत्री रहने के बाद भी इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक निर्णय क्यों नहीं ले पाए।

इसके अलावा, खड़गे ने केंद्र सरकार पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की अमेरिका यात्रा को राजनीतिक कारणों से रोकने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का विदेश जाना निवेश और रोजगार लाने के लिए होता है, जो अंततः देश के विकास में सहायक होता है।

Did You Know?: वन्दे मातरम् को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था, और इसका महत्व स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अत्यंत अधिक था।

Frequently Asked Questions

1. वन्दे मातरम् विवाद क्या है?
विवाद इस बात पर है कि क्या वन्दे मातरम् के केवल दो छंद गाए जाने चाहिए या पूरा गीत, जिसे लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक मतभेद है।

2. खड़गे ने ऐतिहासिक संदर्भ क्या दिया?
खड़गे ने कहा कि 1937 में गांधी, नेहरू और पटेल जैसे नेताओं ने दो छंदों वाले संस्करण को स्वीकार किया था।