पुडुचेरी में CPI(M) ने राशन की दुकानों में आवश्यक वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने और फरवरी 2026 से लंबित चावल की खेप को तुरंत जारी करने की मांग की है। पार्टी ने सरकार की डिजिटल सब्सिडी योजनाओं पर भी सवाल उठाए हैं।
- CPI(M) ने पुडुचेरी सरकार से राशन की दुकानों में सब्सिडी वाली वस्तुओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
- फरवरी 2026 से चावल की आपूर्ति लंबित है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
- पार्टी ने CBDC-आधारित खाद्य सब्सिडी योजना का विरोध किया है, इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खतरा बताया है।
पुडुचेरी में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने केंद्र शासित प्रदेश सरकार से राशन की दुकानों के माध्यम से सब्सिडी वाले आवश्यक सामानों का निर्बाध वितरण सुनिश्चित करने का कड़ा आग्रह किया है। पार्टी के पुडुचेरी सचिव एस. रामचंद्रन ने एक बयान जारी कर कहा कि फरवरी 2026 से चावल की आपूर्ति लंबित है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
गौरतलब है कि पुडुचेरी में राशन की दुकानें सितंबर 2015 से बंद थीं, जिन्हें निरंतर सार्वजनिक विरोध और अभियानों के बाद 21 अक्टूबर 2024 को नागरिक आपूर्ति विभाग के माध्यम से फिर से खोला गया था। हालांकि, CPI(M) का आरोप है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद, सब्सिडी वाले चावल, दाल, गेहूं, चीनी, रवा और कुकिंग ऑयल की नियमित आपूर्ति अभी तक धरातल पर नहीं उतरी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि खाद्य सुरक्षा का मुद्दा सीधे तौर पर निम्न-आय वाले परिवारों की जीवन रेखा से जुड़ा है। खुले बाजार में चावल की कीमतों में प्रति किलो ₹10 से ₹35 तक की वृद्धि ने गरीब आबादी के लिए संकट को और गहरा कर दिया है। यदि सरकारी वितरण प्रणाली विफल होती है, तो यह क्षेत्र में सामाजिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।
खाद्य सुरक्षा केवल आपूर्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों की गरिमा और अस्तित्व का प्रश्न है।
पार्टी ने सरकार की उस योजना की भी आलोचना की है जिसके तहत किसानों से सीधे धान खरीदकर नियंत्रित कीमतों पर लोगों को उपलब्ध कराया जाना था। यह योजना वर्तमान में निष्क्रिय पड़ी है। इसके अलावा, सरकार द्वारा प्रस्तावित सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित खाद्य सब्सिडी वितरण कार्यक्रम का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है।
CPI(M) का तर्क है कि CBDC जैसी डिजिटल योजनाएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को कमजोर कर सकती हैं और अंततः राशन की दुकानों को पूरी तरह बंद करने का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री एन. रंगस्वामी से हस्तक्षेप करने और 500 से अधिक पुन: खोली गई राशन दुकानों के माध्यम से सभी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया है।
Historical Background
पुडुचेरी में राशन प्रणाली का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2015 में दुकानों के बंद होने और मुफ्त चावल योजना के स्थान पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) लागू होने से खाद्य असुरक्षा का एक बड़ा दौर देखा गया था। वर्षों के संघर्ष के बाद ही 2024 में इन दुकानों को फिर से खोलने में सफलता मिली थी।
Frequently Asked Questions
1. CPI(M) की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग राशन की दुकानों में चावल, दाल और तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति और फरवरी 2026 से लंबित चावल को तुरंत वितरित करना है।
2. CBDC आधारित सब्सिडी क्या है?
यह एक डिजिटल प्रणाली है जहाँ खाद्य सब्सिडी सीधे डिजिटल मुद्रा के रूप में दी जाती है, जिसका उपयोग अधिकृत केंद्रों पर किया जा सकता है।