भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने दावा किया है कि CWPRS की रिपोर्ट ने कालेश्वरम परियोजना पर कांग्रेस और भाजपा की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। पूर्व मंत्री जी. जगदीश रेड्डी ने कहा कि बैराजों में कोई बड़ी समस्या नहीं है और उन्हें ठीक किया जा सकता है।
- CWPRS की रिपोर्ट के अनुसार अन्नाराम और सुंडिल्ला बैराज में कोई बड़ी समस्या नहीं है।
- BRS का आरोप है कि कांग्रेस और भाजपा ने कालेश्वरम परियोजना की छवि खराब करने की कोशिश की।
- मेडिगड्डा बैराज को मरम्मत और कोफरडैम निर्माण के जरिए पुन: उपयोग में लाया जा सकता है।
- कृष्णा जल के बंटवारे को लेकर भी राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
तेलंगाना में राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने केंद्र सरकार और राज्य की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दोनों ने मिलकर कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Kaleshwaram Project) की छवि को धूमिल करने की साजिश रची थी। BRS नेता और पूर्व मंत्री जी. जगदीश रेड्डी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय जल और शक्ति अनुसंधान स्टेशन (CWPRS) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए इन दावों को खारिज किया।
जगदीश रेड्डी ने स्पष्ट किया कि CWPRS की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अन्नाराम (Annaram) और सुंडिल्ला (Sundilla) बैराजों में कोई गंभीर संरचनात्मक दोष नहीं है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि मेडिगड्डा बैराज के क्षतिग्रस्त पियर्स (Piers) की मरम्मत के लिए अपस्ट्रीम में एक कोफरडैम (Cofferdam) बनाया जाए, तो इस बैराज को भी फिर से सुचारू रूप से उपयोग में लाया जा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कालेश्वरम परियोजना केवल एक सिंचाई योजना नहीं, बल्कि तेलंगाना की राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु है। इस परियोजना की सफलता या विफलता का सीधा असर राज्य की कृषि उत्पादकता और आगामी चुनावों के समीकरणों पर पड़ता है। CWPRS की रिपोर्ट ने तकनीकी विवाद को राजनीतिक हथियार में बदल दिया है।
CWPRS की रिपोर्ट ने तकनीकी संदेहों को कम कर दिया है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब और तेज होगा।
BRS ने यह भी तर्क दिया कि यदि सरकार ने रणनीतिक रूप से काम किया होता, तो कन्नेपल्ली पंप हाउस का उपयोग बिना मेडिगड्डा में पानी जमा किए भी किया जा सकता था। अन्नाराम और सुंडिल्ला के अपस्ट्रीम पंप हाउसों के माध्यम से पानी को येलमपल्ली तक पहुँचाया जा सकता था, जिससे एल नीनो (El Nino) के प्रभाव के दौरान सूखे की स्थिति से निपटा जा सकता था।
इसके अलावा, कृष्णा नदी के पानी के प्रबंधन पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में सूखे की स्थिति के बावजूद, कांग्रेस सरकार ने आंध्र प्रदेश को पोथिरेड्डीपाडु के माध्यम से 140 टिएमसी फीट (tmc ft) पानी डायवर्ट करने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि यदि श्रीशैलम बांध से जलविद्युत उत्पादन के साथ पानी छोड़ा जाता, तो नागार्जुन सागर में पर्याप्त पानी जमा हो जाता, जिससे लेफ्ट कैनाल के खेतों को राहत मिल सकती थी।
Frequently Asked Questions
1. CWPRS की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार अन्नाराम और सुंडिल्ला बैराजों में कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं है और मेडिगड्डा को मरम्मत के बाद पुनर्जीवित किया जा सकता है।
2. BRS ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए हैं?
BRS का आरोप है कि कांग्रेस ने कृष्णा बेसिन में पानी के प्रबंधन में लापरवाही बरती और आंध्र प्रदेश को पानी डायवर्ट करने में मदद की।
| विशेषता | BRS का दावा | विपक्ष का आरोप |
|---|---|---|
| बैराज स्थिति | सुरक्षित और मरम्मत योग्य | गंभीर संरचनात्मक विफलता |
| पानी का प्रबंधन | रणनीतिक उपयोग की कमी | लापरवाही और राजनीतिक मिलीभगत |