विजयवाड़ा में आयोजित एक सेमिनार में राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे जाति और धर्म से ऊपर उठकर युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक आंदोलनों में बदलें। उन्होंने Gen Z के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और सिस्टम की विफलताओं पर चर्चा की।

  • राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए।
  • Gen Z के आंदोलन केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यवस्थागत विफलताओं के खिलाफ हैं।
  • व्यक्तित्व पूजा (Personality Cult) लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।
  • युवा अब सूचनाओं को बिना सोचे-समझे स्वीकार करने के बजाय सवाल पूछ रहे हैं।

विजयवाड़ा में आयोजित 'राजनीति में युवा शक्ति—Gen Z' विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार के दौरान, प्रख्यात राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव ने देश के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर विचार साझा किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक दलों को संकीर्ण पार्टी लाइनों से ऊपर उठना होगा ताकि वे युवाओं को सशक्त बना सकें और उन्हें देश की चुनौतियों का सामना करने के लिए रचनात्मक आंदोलनों में बदलने में मदद कर सकें।

प्रोफेसर यादव ने रेखांकित किया कि हालांकि भारत ने स्वतंत्रता के आठ दशकों का लाभ उठाया है, लेकिन वर्तमान पीढ़ी को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के एक जटिल जाल का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिक समाज और राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं की आकांक्षाओं को सही दिशा दें।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) तभी सार्थक होगी जब युवा केवल मतदाता न रहकर नीति-निर्धारक और सक्रिय भागीदार बनेंगे। Gen Z का बढ़ता राजनीतिक रुझान पारंपरिक राजनीतिक ढांचे को बदलने की क्षमता रखता है।

योगेंद्र यादव ने भाजपा की कुछ हालिया पहलों, जैसे कि परिसीमन और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चेतावनी दी कि सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करने के लिए लोगों को जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठना होगा। उन्होंने हाल ही में NEET परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर हुए Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह विभिन्न प्रणालियों में 'लीकेज' और विफलताओं के प्रति व्यापक युवाओं के गुस्से का प्रतीक है।

राजनीतिक दलों को युवाओं की ऊर्जा को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के इंजन के रूप में देखना चाहिए।

राजनीतिक वैज्ञानिक एन. सुकुमार ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीति में 'व्यक्तित्व पूजा' (Personality Cult) का बढ़ता चलन अधिनायकवाद को जन्म दे सकता है, जो लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने आंध्र प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

वहीं, CPI(M) के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि आज का युवा 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' के माध्यम से प्रसारित होने वाले संदेशों को बिना सोचे-समझे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने Gen Z के आंदोलनों को देश के लिए एक प्रगतिशील विकास बताया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश ऐतिहासिक रूप से वामपंथी और दलित आंदोलनों का केंद्र रहा है। छात्र संगठनों जैसे SFI, AISF और युवा समूहों की सक्रियता ने राज्य की राजनीति को हमेशा एक दिशा दी है। वर्तमान में Gen Alpha के माध्यम से सरकारी स्कूलों में सुधार की मांग भी एक नया मोड़ ले रही है।

Did You Know?: 'Gen Z' शब्द उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जिनका जन्म लगभग 1997 और 2012 के बीच हुआ है, जो डिजिटल युग के पहले निवासी हैं।

Frequently Asked Questions

1. योगेंद्र यादव ने युवाओं के लिए क्या सुझाव दिया?
उन्होंने सुझाव दिया कि राजनीतिक दलों को युवाओं को केवल वोट के लिए उपयोग करने के बजाय उन्हें रचनात्मक और सामाजिक सुधार आंदोलनों में शामिल करना चाहिए।

2. Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण क्या था?
यद्यपि NEET परीक्षा में अनियमितताएं एक तात्कालिक कारण थीं, लेकिन ये आंदोलन व्यवस्थागत भ्रष्टाचार और विफलताओं के खिलाफ व्यापक असंतोष का परिणाम हैं।