एमनेस्टी इंटरनेशनल की जांच ने पुष्टि की है कि दिल्ली में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने पेलेट गन, ग्रेनेड और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस जैसे घातक हथियारों का उपयोग किया। यह रिपोर्ट सरकार के उन दावों को चुनौती देती है जिनमें बल प्रयोग को 'सीमित' बताया गया था।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों में घातक हथियारों के उपयोग की पुष्टि की है।
- सुरक्षा बलों ने पेलेट गन, ग्रेनेड और इलेक्ट्रिक शॉक लाठियों का इस्तेमाल किया।
- रिपोर्ट में पुलिस के उन दावों को गलत बताया गया है जिनमें बल प्रयोग को अनुचित नहीं कहा गया था।
- विरोध प्रदर्शन पेपर लीक घोटाले के खिलाफ आयोजित किए जा रहे थे।
मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक हालिया जांच ने उन गंभीर आरोपों की पुष्टि की है, जो पिछले महीने नई दिल्ली में हुए 'जेन-जी' (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पेलेट-फायरिंग शॉटगन, ग्रेनेड, लाठियों और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस जैसे घातक हथियारों का उपयोग किया।
यह पूरा घटनाक्रम 20 जुलाई को शुरू हुआ, जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग को अवरुद्ध कर दिया था। प्रदर्शनकारियों की मांग तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, जो राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से उपजा आक्रोश था। इस दमनकारी कार्रवाई में 100 से अधिक छात्र घायल हुए थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के उल्लंघन का है। जब सुरक्षा बल उन हथियारों का उपयोग करते हैं जो उनके अपने दिशा-निर्देशों के विरुद्ध हैं, तो यह राज्य की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
"हथियारों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और घरेलू पुलिसिंग दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से किया गया था," एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने बयान में कहा।
एमनेस्टी के 'एविडेंस लैब' ने वीडियो साक्ष्य, फोटोग्राफिक सबूत और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। जांच में पाया गया कि पुलिस ने भीड़ पर पेलेट गन चलाने से पहले कोई सार्वजनिक चेतावनी जारी नहीं की, जो कि भारत के पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो (BPR&D) के नियमों के खिलाफ है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को 'फेक न्यूज' करार दिया था, लेकिन सुरक्षा बलों की एक आंतरिक जांच में पुष्टि हुई है कि कर्मियों ने धातु के पेलेट्स वाले कम से कम सात राउंड फायर किए थे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: प्रदर्शनकारी क्यों विरोध कर रहे थे?
उत्तर: प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक होने के खिलाफ और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध कर रहे थे।
प्रश्न 2: एमनेस्टी की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या है?
उत्तर: रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक और गैर-कानूनी रूप से घातक हथियारों का उपयोग किया।