राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में महिला छात्रों को मनुस्मृति‑मानसिकता की निंदा करते हुए ‘पैट्रियार्की तोड़ो’ का आह्वान किया। इसके जवाब में बीजेपी नेताओं ने उनकी बातों को हिन्दू धर्म के विरुद्ध एक षड्यंत्र बताया।
- राहुल गांधी ने मनुस्मृति‑मानसिकता की आलोचना की
- बीजेपी ने उनकी टिप्पणी को महिला अधिकारों के दुरुपयोग के रूप में देखी
- यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण को बढ़ा रहा है
लोकसभा के विपक्षी नेता राहुल गांधी ने 22 अगस्त को महाराष्ट्र में महिला छात्रों से संवाद करते हुए “मनुस्मृति मनोवृत्ति” की निंदा की और “पैट्रियार्की तोड़ो” का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला अपने पिता, पति या पुत्र की नहीं, बल्कि स्वयं की है।
इन बयानों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई नेताओं ने तीखा प्रतिवाद किया। सांसद निशिकांत दुबे ने मनुस्मृति के दो श्लोक उद्धृत कर कहा कि महिलाओं का सम्मान और पूजन ही ईश्वर का निवास है, और गांधी जी को इन श्लोकों को पढ़ कर समझना चाहिए।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी राहुल गांधी को “महिला सशक्तिकरण को हिन्दू धर्म को लक्षित करने के बहाने” कहा और पूछा कि उन्होंने शरिया के समान मनुस्मृति की कितनी बार आलोचना की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मनुस्मृति, प्राचीन वैदिक शास्त्रों में से एक, को अक्सर भारत में महिलाओं के अधिकारों के संदर्भ में विवादित माना रहा है। 19वीं सदी के सामाजिक सुधारकों ने इसे महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण माना, जबकि कुछ हिंदू समूह इसे सांस्कृतिक विरासत मानते हैं। भारतीय न्यायपालिका ने भी कई मामलों में इस ग्रन्थ की वैधता पर प्रश्न उठाए हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस प्रकार की बहसें राष्ट्रीय स्तर पर धर्म‑राजनीति और लैंगिक समानता के मुद्दों को एक साथ जोड़ती हैं, जिससे चुनावी रणनीतियों में नया मोड़ आता है।
“राजनीतिक वक्तव्यों को सामाजिक सुधार के बजाय वोट बैंक को लक्ष्य बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या राहुल गांधी ने पहले भी मनुस्मृति की आलोचना की थी?
उत्तर: हाँ, उन्होंने पिछले वर्षों में भी इस ग्रन्थ के कुछ पहलुओं को असमानता के रूप में दर्शाया है।
प्रश्न 2: क्या यह विवाद आगामी चुनावों को प्रभावित करेगा?
उत्तर: संभावित रूप से, क्योंकि धर्म‑राजनीति और महिला अधिकारों के मुद्दे भारतीय मतदाता वर्ग में संवेदनशील हैं।