बीजेपी ने कांग्रेस के इस आरोप को नकारते हुए कहा कि भारत का अंतरिक्ष इकोसिस्टम सरकारी‑केन्द्रित से निजी‑उद्यमी सहयोग की ओर विस्तारित हो रहा है। इस विकास में ISRO, निजी कंपनियों और स्टार्ट‑अप्स की भागीदारी प्रमुख है।

  • ISRO ने 2014 से 399 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए
  • स्पेस स्टार्ट‑अप्स 2014 में 1 से बढ़कर 2026 में 440
  • NSIL की आय 2021‑22 में ₹321.77 करोड़ से 2024‑25 में ₹3,000 करोड़ तक बढ़ी

बीजेपी ने सोमवार (24 अगस्त 2026) को कांग्रेस के इस आरोप को दृढ़ता से खारिज किया कि नरेंद्र मोदी सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र को "आक्रामक निजीकरण" की राह पर ले जा रही है। पार्टी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि ISRO, निजी उद्योग और सैकड़ों स्टार्ट‑अप्स के मिलेजुले इकोसिस्टम में बदल गया है।

कांग्रेस का आरोप और बीजेपी का जवाब

कांग्रेस सांसद और संचार मंत्री जयराम रमेश ने अपने X पोस्ट में कहा, "जैसे नाभिकीय ऊर्जा में, मोदी सरकार ने अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी आक्रामक निजीकरण एजेंडा अपनाया है…"। भंडारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "संख्याएँ खुद बात करती हैं। पीएम @narendramodi के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी‑केन्द्रित से इकोसिस्टम‑आधारित बदलाव स्पष्ट है।"

संख्याओं से स्पष्ट वृद्धि

भंडारी ने बताया कि 2014 से पहले ISRO ने 35 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए, जबकि जनवरी 2026 तक यह संख्या 399 तक पहुँच गई। इसी अवधि में स्टार्ट‑अप्स की संख्या 1 से बढ़कर अगस्त 2026 में 440 हो गई। 2021‑22 में निजी निवेश लगभग $100.5 मिलियन था, जो मार्च 2026 तक लगभग छह गुना बढ़ गया।

NSIL की आय में अभूतपूर्व उछाल

ISRO के व्यावसायिक शाखा NewSpace India Limited (NSIL) की आय 2021‑22 में ₹321.77 करोड़ से बढ़कर 2024‑25 में लगभग ₹3,000 करोड़ हो गई। यह वृद्धि भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं के व्यावसायिककरण का संकेत देती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the rapid expansion of India’s NewSpace ecosystem not only strengthens the country’s strategic autonomy but also creates a fertile ground for high‑tech jobs, foreign investment, and indigenous innovation, positioning India as a major contender in the global space race.

"India’s shift from a purely governmental space program to a vibrant private‑public partnership marks a historic turning point for its aerospace ambitions," says Dr. Ananya Mehta, senior space policy analyst.

निजी कंपनियों की नई भूमिका

भंडारी ने कहा, "सबसे बड़ा परिवर्तन ISRO के बाहर हो रहा है। निजी कंपनियों ने केवल सप्लायर से विकासकर्ता की भूमिका में कदम रखा है।" उन्होंने स्कायरूट एयरोस्पेस की विक्रम‑1 को उदाहरण देते हुए कहा, "जुलाई 2026 में कक्षा में पहुँचा यह पहला निजी विकसित कक्षा‑रॉकेट भारत के लिए नई दिशा का प्रतीक है।"

Did You Know?: भारत ने 2026 में दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के पास सॉफ्ट‑लैंडिंग की पहली सफलता हासिल की, जो केवल पाँच देशों ने पहले हासिल की थी।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या निजी कंपनियों की भागीदारी ISRO की भूमिका को कम कर रही है?
A: नहीं, निजी कंपनियों का जुड़ना ISRO की क्षमताओं को पूरक करता है और राष्ट्रीय अंतरिक्ष लक्ष्य को तेज़ करता है।

Q2: इस विस्तार से भारत की अंतरिक्ष निर्यात क्षमता पर क्या असर पड़ेगा?
A: बढ़ती निजी निवेश और तकनीकी आत्मनिर्भरता भारत को अंतरिक्ष सेवाओं के निर्यात में प्रतिस्पर्धी बनाती है।