चुनाव आयोग ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया है कि तिरुची ईस्ट, पेरुनदुरई, अंबसामुद्रम, विरलीमलई और करूर विधानसभा सीटों पर चुनावी याचिकाओं का निपटारा होने तक उपचुनाव नहीं कराए जाएंगे।

  • चुनाव आयोग ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव आयोजित करने में कानूनी बाधा का हवाला दिया है।
  • मामला मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित है और याचिकाकर्ताओं ने स्वयं को निर्वाचित उम्मीदवार घोषित करने की मांग की है।
  • सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर, जब तक चुनावी याचिकाओं का फैसला नहीं होता, तब तक सीट खाली नहीं मानी जा सकती।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया कि वह तिरुची ईस्ट, पेरुनदुरई, अंबसामुद्रम, विरलीमलई और करूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनावों की अधिसूचना जारी करने का इरादा नहीं रखता है। यह निर्णय तब लिया गया है जब इन पांचों सीटों के संबंध में चुनावी याचिकाएं (Election Petitions) विचाराधीन हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अर्चना पटनायक ने एक जवाबी हलफनामा दायर करते हुए स्पष्ट किया कि आयोग तब तक उपचुनावों की घोषणा नहीं करेगा जब तक कि निर्वाचित उम्मीदवारों की जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय नहीं हो जाता। यह कदम एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में उठाया गया है, जो इन सीटों पर चुनावी प्रक्रिया की वैधता से जुड़ी है।

कानूनी जटिलता और सुप्रीम कोर्ट का रुख

ECI के इस रुख का मुख्य आधार कानूनी व्याख्या है। आयोग ने अदालत को बताया कि 1967 के संजीवैया बनाम चुनाव न्यायाधिकरण, आंध्र प्रदेश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई याचिकाकर्ता केवल जीत को चुनौती नहीं दे रहा है, बल्कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 84 के तहत स्वयं को निर्वाचित उम्मीदवार घोषित करने की मांग भी कर रहा है, तो उपचुनाव कराना जटिलता पैदा कर सकता है।

यदि एक ही सीट के लिए दो दावेदार (एक निर्वाचित और एक याचिकाकर्ता) मौजूद हों, तो उपचुनाव से कानूनी संघर्ष और बढ़ सकता है।

यद्यपि 1996 में संसद ने धारा 151-A जोड़ी थी, जो रिक्ति होने के छह महीने के भीतर उपचुनाव अनिवार्य करती है, लेकिन 2010 के ECI बनाम तेलंगाना राष्ट्र समिति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 151-A और धारा 84 को एक साथ और सामंजस्यपूर्ण तरीके से पढ़ा जाना चाहिए।

राजनीतिक संदर्भ और वर्तमान स्थिति

बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, एस. जेयकुमार, ई. सुबया, सी. विजयबास्कर और एम.आर. विजयबास्कर मई 2026 के चुनावों में इन पांच सीटों से निर्वाचित हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। चूंकि याचिकाकर्ताओं ने इन रिक्तियों के दौरान स्वयं को विजेता घोषित करने की मांग की है, इसलिए आयोग कानूनी विवाद से बचने के लिए प्रक्रिया को रोक रहा है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला चुनावी कानून की व्याख्या के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जहाँ 'रिक्तता' और 'दावेदारी' के बीच का अंतर राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करेगा।

Frequently Asked Questions

1. किन पांच सीटों पर उपचुनाव फिलहाल स्थगित हैं?
तिरुची ईस्ट, पेरुनदुरई, अंबसामुद्रम, विरलीमलई और करूर विधानसभा सीटें।

2. चुनाव आयोग ने उपचुनाव क्यों नहीं कराने का फैसला किया?
क्योंकि इन सीटों पर चुनावी याचिकाएं लंबित हैं और याचिकाकर्ताओं ने खुद को निर्वाचित घोषित करने की मांग की है, जिससे कानूनी टकराव की स्थिति बन सकती है।

Did You Know?: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151-A उपचुनावों के लिए 6 महीने की समय सीमा निर्धारित करती है, लेकिन यह चुनावी याचिकाओं के प्रभाव को कम नहीं करती।