कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है, जिसमें राज्य भर में 1.07 करोड़ से अधिक नामों को हटा दिया गया है। बेंगलुरु में अकेले 24 लाख से अधिक लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे।
- राज्य भर में 1.07 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
- बेंगलुरु में 24.05 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे।
- अगस्त 24 से सितंबर 22 तक दावा और आपत्ति दर्ज करने की अवधि है।
- ASDDO श्रेणी में नाम आने पर फॉर्म 6 भरकर पुन: शामिल होने के लिए आवेदन करें।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने राज्य के लिए ड्राफ्ट मतदाता सूची आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। इस विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के दौरान एक अभूतपूर्व बदलाव देखा गया है, जहाँ राज्य भर में 1.07 करोड़ से अधिक नामों को मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा प्रभाव बेंगलुरु में देखने को मिल रहा है। बेंगलुरु, जिसकी मतदाता संख्या पहले 1.03 करोड़ थी, अब घटकर मात्र 56.11 लाख रह गई है। अकेले बेंगलुरु में 24.05 लाख नोटिस जारी किए जाएंगे, जो राज्य के कुल 43.80 लाख नोटिसों का एक बड़ा हिस्सा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम हटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि मतदाता सूची में केवल वास्तविक और सक्रिय मतदाता ही मौजूद रहें, लेकिन इसके साथ ही 'Logical Discrepancies' (तार्किक विसंगतियों) के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के बाहर होने का जोखिम भी बना हुआ है।
मतदाता सूची का यह शुद्धिकरण प्रक्रियात्मक रूप से आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रह जाए।
जिन मतदाताओं के नाम Absent, Shifted, Duplicate, Dead or Others (ASDDO) श्रेणियों के तहत चिह्नित किए गए हैं, उन्हें 24 अगस्त से 22 सितंबर के बीच 'दावा और आपत्ति' अवधि के दौरान फॉर्म 6 भरकर पुन: शामिल होने के लिए आवेदन करना होगा।
नोटिस वितरण और सुनवाई की प्रक्रिया: बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर नोटिस वितरित करेंगे। नोटिस में एक QR कोड होगा जिसे स्कैन करके मतदाता अपने दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। हालांकि, सुनवाई के लिए मतदाता को व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का उपयोग तब किया जाता है जब डेटा में भारी विसंगतियां पाई जाती हैं। कर्नाटक में इस बार 2002 की मतदाता सूचियों के साथ मिलान न होने के कारण भी कई नामों को हटाया गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यदि मेरा नाम सूची से कट गया है, तो मैं क्या करूँ?
उत्तर: आप 22 सितंबर तक फॉर्म 6 भरकर अपना नाम वापस जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या मैं ऑनलाइन दस्तावेज जमा कर सकता हूँ?
उत्तर: हाँ, नोटिस पर दिए गए QR कोड से दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं, लेकिन सुनवाई के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक है।