महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो‑रिक्शा चालकों को मराठी सीखने का नियम दो शिवसेना धड़ों के बीच नई लड़ाई का कारण बन गया है। एखनाथ शिंदे की सरकार ने नियम लागू किया, जबकि उद्धव थाकरे की शाखा इसे रोजगार सुरक्षा के मुद्दे में बदल रही है।

  • मराठी भाषा दक्षता अनिवार्य, 8,217 ड्राइवरों की पहली जाँच.
  • ड्राइवरों ने कांडिवाली लिंक रोड पर 3‑दिन का विरोध किया.
  • दोनों शिवसेना धड़े इस मुद्दे को राजनैतिक शक्ति संघर्ष में बदल रहे हैं.

पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2026 में ऑटो‑रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा दक्षता अनिवार्य कर दी। यह कदम 1990 के दशक में शुरू हुए मराठी भाषा संरक्षण आंदोलन की निरंतरता माना जाता है, लेकिन अब यह दो राजनीतिक धड़ों के बीच नया मोर्चा बन गया है।

नियम का कार्यान्वयन

परिवहन मंत्री प्रताप सारनाइक के नेतृत्व में राज्य परिवहन विभाग ने 20 अगस्त को पहले दिन 8,217 चालकों को जांचा, जिसमें से 1,268 को मराठी ज्ञान की कमी के कारण नोटिस जारी किया गया। असफल ड्राइवरों को एक महीने में भाषा सीखने का समय दिया गया, दो बार असफलता पर तीन महीने तक निलंबन का प्रावधान है।

शिंदे‑शिवसेना का कदम

एखनाथ शिंदे की शिवसेना इस नियम को अपने मराठी‑संरक्षण के मंच को सुदृढ़ करने के साधन के रूप में प्रस्तुत कर रही है। शिंदे ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन में संवाद के लिए स्थानीय भाषा अनिवार्य होनी चाहिए, जिससे सरकार के प्रति उनका समर्थन दिखे।

उद्धव‑शिवसेना की प्रतिक्रिया

उद्धव ठाकरे की शाखा (UBT) ने भाषा आवश्यकता को स्वीकार किया, परन्तु इसको मराठी चालकों की आजीविका से जोड़ते हुए सरकार को रैपिडो, ओला और उबर जैसी बाइक‑टैक्सी सेवाओं पर रोक लगाने की मांग की। सांसद संजय राउत ने सारनाइक को पत्र लिखते हुए कहा कि इन सेवाओं से मराठी ऑटो ड्राइवरों की आय पर असर पड़ेगा।

ड्राइवरों की मुश्किलें

ऑटो यूनियन के प्रमुख शशांक राव ने प्रशिक्षण केंद्रों की कमी को उजागर किया और तीन महीने के विस्तार की मांग की। कई वरिष्ठ ड्राइवरों ने बताया कि उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं पाई, इसलिए मराठी में संवाद स्थापित करना उनके लिए कठिन है। यह मुद्दा केवल भाषा नहीं, बल्कि जुर्माना, आय और परीक्षण की कठिनाई को भी छूता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the language rule is being weaponized by rival Shiv Sena factions to claim authentic representation of the “Marathi manoos”. While Shinde’s camp uses it to showcase governance, Uddhav’s side ties it to livelihoods, turning a cultural demand into an economic battle that could reshape voter loyalties in Mumbai’s multicultural urban fabric.

“मराठी भाषा का दायित्व सार्वजनिक सेवा में संवाद की नींव बनता है, लेकिन इसे राजनीति के हथियार में बदलना सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है,” कहा भाषा नीति विशेषज्ञ डॉ. सुनील पाटिल।
Did You Know?: 1995 में पहली बार महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं में मराठी भाषा को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन इसे केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित रखा गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या मराठी सीखने में असफल ड्राइवरों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा?

उत्तर: पहली विफलता पर एक महीने का सीखने का समय दिया जाता है; दो बार असफलता पर अधिकतम तीन महीने तक निलंबन हो सकता है, लेकिन स्थायी बर्खास्तगी नहीं।

प्रश्न 2: बाइक‑टैक्सी सेवाओं पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है?

उत्तर: सरकार ने कहा कि यह समान नियम लागू करने के लिए है, जबकि विरोधी पक्ष इसे मराठी ड्राइवरों की आय को नुकसान पहुँचाने वाला मानता है।