डायएफआई और यूथ कांग्रेस ने पलक्कड़ में डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) के कार्यालय के सामने बड़े मार्च आयोजित किए, जिससे रेलवे बोर्ड के निर्णय को वापस लेने की मांग हुई। पुलिस द्वारा कई गिरफ़्तारियों और आगामी भूख हड़ताल से माहौल गरम हो गया।
- पलक्कड़ रेलवे विभाग के विभाजन को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध
- डायएफआई और यूथ कांग्रेस ने DRM कार्यालय के सामने मार्च किया
- पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया; भूख हड़ताल की घोषणा
विरोध का विस्तार
केरल के पलक्कड़ में सोमवार को रेलवे बोर्ड के निर्णय के खिलाफ विरोध तेज हो गया, जिसमें मंगलुरु‑उल्लाल सेक्शन को पलक्कड़ रेलवे विभाग से दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर विभाग में स्थानांतरित करने की योजना थी। डेमोक्रेटिक युथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डायएफआई) ने डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) के कार्यालय, ओलावकोड, के सामने मार्च किया और निर्णय वापस लेने की मांग की।
मुख्य घटनाक्रम
सीपीआई(एम) जिला सचिव ई.एन. सुरेश बाबु ने विरोध को उद्घाटित किया, जबकि डायएफआई जिला सचिव जयदेव ने पाँच सदस्यीय समूह को DRM कार्यालय में प्रवेश कराया। कई प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के चारों गेट को ब्लॉक किया, दीवार पर चढ़े और पुलिस व रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के साथ टकराव हुआ। कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
डायएफआई राज्य सचिव एम. विजिन, विधायक, ने कहा कि विभागीय विभाजन को वापस नहीं ले लिया गया तो आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यूडीएफ सरकार की इस कदम के खिलाफ आवाज न उठाने की निंदा भी की। यूथ कांग्रेस ने भी अपने जिला समिति के नेतृत्व में DRM कार्यालय के सामने मार्च किया, जिसे सांसद वी.के. श्रीकंदन ने उद्घाटित किया।
आगे की कार्रवाई
डायएफआई ने अगले मंगलवार को कन्नूर, कासरगोड, कोझिकोड, मलप्पुरम और पलक्कड़ के रेलवे स्टेशनों पर विरोध मार्च करने की घोषणा की। यूडिएफ़ ने बुधवार, थिरुवोनाम दिवस को DRM कार्यालय के सामने भूख हड़ताल का ऐलान किया, जिसमें राज्य के कई सांसद भाग लेंगे।
Historical Background
पलक्कड़ रेलवे विभाग, जो 1956 में स्थापित हुआ, ने दक्षिणी भारत में माल व यात्रियों के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले कुछ दशकों में, रेलवे विभागीय पुनर्गठन के कई प्रस्ताव सामने आए हैं, लेकिन अधिकांश को स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। इस बार का प्रस्ताव, जो दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर विभाग में सेक्शन को जोड़ने का है, आर्थिक दक्षता के नाम पर पेश किया गया, परन्तु स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय जुड़ाव को खतरे में डालता माना जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the split could set a precedent for further decentralization of railway zones, potentially affecting freight routes, regional employment, and political dynamics in Kerala's coalition politics.
"Railway restructuring must balance efficiency with the socio‑economic fabric of the regions it serves," says transport economist Dr. Anil Kumar.
Frequently Asked Questions
Q: इस विभाजन से स्थानीय यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
A: यदि सेक्शन को मैसूर विभाग में स्थानांतरित किया गया, तो ट्रेन शेड्यूल और रूटिंग में बदलाव हो सकता है, जिससे समय‑सारिणी में देरी और टिकट की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
Q: क्या सरकार ने इस निर्णय को पुनर्विचार करने का कोई संकेत दिया है?
A: अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, परन्तु लगातार बढ़ते विरोध और भूख हड़ताल के दबाव से निर्णय में परिवर्तन की संभावना बढ़ रही है।