पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद की संयुक्त समिति को बताया कि समकालिक चुनावों का प्रस्ताव संविधान की मूलभूत संरचना, विशेषकर संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों को कमजोर करता है। वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बिना दो‑तिहाई बहुमत के यह विधेयक पारित नहीं हो सकता।

  • चिदंबरम का मानना है कि संयुक्त चुनाव संविधान की मूल संरचना को कमजोर करते हैं।
  • विधेयकों को पास करने के लिए दो‑तिहाई बहुमत आवश्यक है, जो वर्तमान में सरकार के पास नहीं है।
  • विरोधी दलों को चुनाव आयोग को अत्यधिक शक्ति मिलने का डर है।

सांसद समिति में सुनवाई

संघीय संसद की संयुक्त समिति ने 129वें संशोधन बिल और केन्द्र शासित प्रदेश अधिनियम पर चर्चा की, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के समकालिक चुनावों की व्यवस्था है। इस मंच पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजभाषा सभा सदस्य पी. चिदंबरम ने प्रस्ताव की बुनियादी त्रुटियों को उजागर किया।

संविधान की मूल संरचना पर प्रश्न

चिदंबरम ने कहा कि किसी भी विधायिका का कार्यकाल पाँच वर्ष निर्धारित है और इसे कम करना सीधे संविधान के मूल ढाँचे का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका विवेक उन्हें इन विधेयकों का समर्थन करने से रोकता है, क्योंकि सरकार के पास दो‑तिहाई बहुमत नहीं है।

विपक्षी दलों की आपत्तियां

विपक्षी पक्ष के कई सदस्य इस बात से असहमत हैं कि चुनाव आयोग को इतनी बड़ी शक्ति दी जाए। उनका तर्क है कि यह लोकतांत्रिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात की संभावना बढ़ा सकता है।

पद्म पुरस्कार विजेताओं की विविध राय

बैठक में पद्म पुरस्कार विजेताओं के एक समूह ने भी भाग लिया। कुछ ने समकालिक चुनावों को विकास परियोजनाओं में बाधा डालने वाले मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के बार‑बार लागू होने से बचाव के रूप में सराहा, जबकि अन्य ने संभावित जोखिमों को उजागर किया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the debate over simultaneous elections is not merely a procedural issue; it touches upon the balance of power between the legislature and the Election Commission, and could set precedents affecting federal dynamics across India.

"संविधान के मूल सिद्धांतों को बदलना लोकतंत्र के लिए जोखिमपूर्ण कदम है," कहा संविधान विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Did You Know?: भारत में पहली बार संयुक्त चुनाव 1952 के लोकसभा चुनाव में हुए थे, जब राष्ट्रपति चुनाव भी साथ में करवाया गया।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या संयुक्त चुनावों के लिए दो‑तिहाई बहुमत अनिवार्य है?

उत्तर: हाँ, संविधान संशोधन के लिए दो‑तिहाई बहुमत आवश्यक है, और वर्तमान में यह बहुमत केंद्र सरकार के पास नहीं है।

प्रश्न 2: इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा विरोधी कारण क्या है?

उत्तर: मुख्य कारण चुनाव आयोग को अत्यधिक शक्ति देना और राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को कम करना माना जा रहा है।