हरियाणा की बीजेपी सरकार ने चमार वर्ग के लोगों को उनके जाति प्रमाणपत्रों पर ‘मेघवाल’ शब्द इस्तेमाल करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम को दलित वर्ग के कुछ हिस्सों ने ‘विभाजन और शासित करने’ की नीति बताया है, जबकि सरकार इसे सामाजिक सम्मान की दिशा में कदम मान रही है।
- हरियाणा सरकार ‘चमार’ को ‘मेघवाल’ में बदलने की सिफारिश करेगी।
- यह प्रस्ताव दलित समुदाय के भीतर विभाजन की आशंकाएँ पैदा कर रहा है।
- SC उप‑श्रेणीकरण के बाद आरक्षण में अंतर स्पष्ट हो गया है।
पृष्ठभूमि
हिन्दुस्तान के उत्तर भाग में स्थित हरियाणा में अनुसूचित जातियों (SC) का कुल जनसंख्या में लगभग 20% हिस्सा है। इनमें सबसे बड़ी उप‑समुदाय चमार है, जबकि मेघवाल मुख्यतः राज्य के सीमा क्षेत्र में रजस्थान के साथ रहीं हैं। अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य ने SC उप‑श्रेणीकरण लागू किया, जिससे मेघवाल और चमार अलग‑अलग समूहों में विभाजित हुए।
सरकार का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 25 अगस्त को रेवरी के बवाल में आयोजित मेघवाल उत्थान समिति के कार्यक्रम में घोषणा की कि वह केंद्र सरकार को ‘चमार’ के बजाय ‘मेघवाल’ शब्द को जाति प्रमाणपत्रों में शामिल करने की सिफारिश करेंगे। उन्होंने कहा, “समुदाय की मांग के अनुसार हम इस परिवर्तन को सुविधाजनक बनाएँगे।”
समुदाय की प्रतिक्रिया
पांच बार कांग्रेस के विधायक और दलित नेता गीता भुकेल ने इस कदम को “विभाजन और शासित करने” की रणनीति कहा और कहा कि इससे समुदाय में “असंतोष” बढ़ रहा है। वहीं, मेघवाल उत्थान समिति के सचिव भुपेंद्र मेघवाल ने बताया कि राज्य ने पहले ही 60,000 से अधिक प्रमाणपत्र ‘मेघवाल’ शब्द के साथ जारी किए हैं और अब सभी चमारों को यह विकल्प चाहिए।
उप‑श्रेणीकरण का असर
उप‑श्रेणीकरण के बाद मेघवाल “वंचित अनुसूचित जातियों” समूह में और चमार “अन्य अनुसूचित जातियों” समूह में सूचीबद्ध हैं। इन दो समूहों के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अलग‑अलग आरक्षण प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जिससे एक उप‑समुदाय का दूसरे में परिवर्तन सरल नहीं रहा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the move could reshape caste‑based political equations in Haryana, potentially altering vote banks ahead of the 2027 state elections.
“जातीय पहचान में शब्द परिवर्तन से केवल प्रतीकात्मक ही नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक‑आर्थिक लाभों पर भी असर पड़ता है,” एक सामाजिक विज्ञान विशेषज्ञ ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या चमार अब सभी सरकारी दस्तावेजों में ‘मेघवाल’ शब्द का उपयोग कर पाएँगे?
उत्तर: सरकार की सिफारिश मंजूर होने पर, केवल उन व्यक्तियों को यह विकल्प मिलेगा जो प्रमाणपत्र में बदलाव चाहते हैं।
प्रश्न 2: इस बदलाव का आरक्षण प्रतिशत पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: वर्तमान उप‑श्रेणीकरण के तहत दोनों समूहों के अलग‑अलग कोटा हैं; परिवर्तन से कोटा पुनःत्रुटि हो सकती है, परन्तु अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के नियमों पर निर्भर करेगा।