शक्तिशाली प्रो-इजरायल लॉबी ग्रुप AIPAC अब अमेरिकी राजनीति में दोनों पक्षों के लिए एक बोझ बनता जा रहा है। मिशिगन के रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स द्वारा सहायता ठुकराने के फैसले ने इस संगठन की घटती पकड़ की ओर इशारा किया है।
- रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स ने चुनाव में AIPAC के समर्थन से इनकार कर दिया है।
- प्रगतिशील डेमोक्रेट्स और अब रिपब्लिकन भी इस लॉबी से दूरी बना रहे हैं।
- AIPAC ने चुनावी खर्च में भारी वृद्धि की है, लेकिन उसे चुनावी हार का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिका की राजनीति में दशकों से एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला संगठन, अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी (AIPAC), अब एक कठिन दौर से गुजर रहा है। हालिया घटनाक्रमों ने संकेत दिया है कि यह शक्तिशाली लॉबी न केवल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील खेमे, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी अपनी पकड़ खो रही है। मिशिगन के रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स द्वारा AIPAC से अपने लिए अभियान न चलाने का अनुरोध करना इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मिशिगन, जो अमेरिका की सबसे बड़ी अरब-अमेरिकी आबादी वाले राज्यों में से एक है, वहां रोजर्स को डर है कि AIPAC का खुला समर्थन उनके खिलाफ जा सकता है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब रोजर्स ने लॉस एंजिल्स में AIPAC के अध्यक्ष माइक तुचिन से मुलाकात की। यह स्पष्ट करता है कि अब अमेरिकी मतदाता, विशेष रूप से विविध समुदायों में, इजरायल के प्रति अमेरिका के बिना शर्त समर्थन को चुनौती दे रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि AIPAC की रणनीति में बदलाव और उसके द्वारा खर्च किए जा रहे अरबों डॉलर अब भी चुनावी परिणामों को नियंत्रित करने में विफल हो रहे हैं। यह अमेरिकी विदेश नीति और घरेलू राजनीति के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
AIPAC का बढ़ता चुनावी खर्च और उसके बावजूद उम्मीदवारों की हार यह दर्शाती है कि केवल पैसा अब अमेरिकी मतदाताओं के बदलते रुख को नहीं बदल सकता।
AIPAC की स्थापना 1954 में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य इजरायल के लिए अमेरिकी आर्थिक और सैन्य सहायता सुनिश्चित करना था। 1980 के दशक के बाद, इसने राजनीतिक एक्शन कमेटियों (PACs) के माध्यम से चुनावी राजनीति में अपनी पैठ बनाई। हाल के वर्षों में, AIPAC ने अपने सहयोगी United Democracy Project (UDP) के माध्यम से भारी धनराशि खर्च की है। 2026 के चक्र के दौरान, UDP ने लगभग $104 मिलियन जुटाए, जो 2024 की तुलना में $87.1 मिलियन अधिक है।
हालांकि, भारी खर्च के बावजूद, परिणाम अक्सर इसके विपरीत रहे हैं। उदाहरण के लिए, मिशिगन के डेमोक्रेटिक प्राइमरी में AIPAC ने हेली स्टीवंस के समर्थन में $30 मिलियन से अधिक खर्च किए, लेकिन अंततः अब्दुल अल-सय्यद ने चुनाव जीत लिया। यह दर्शाता है कि स्थानीय मुद्दे और मानवीय अधिकार अब लॉबी के प्रभाव पर भारी पड़ रहे हैं।
| विशेषता | पारंपरिक रणनीति | वर्तमान रणनीति (2026) |
|---|---|---|
| मुख्य फोकस | द्विपक्षीय सहयोग | चुनावी हस्तक्षेप (PACs) |
| खर्च का स्तर | सीमित | अत्यधिक उच्च (लाखों डॉलर) |
| प्रभावशीलता | उच्च | घटती हुई (विपरीत परिणाम) |
AIPAC अब 'शेल PACs' का उपयोग करके अपने खर्च को छिपाने की कोशिश कर रहा है, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। 'A Stronger Michigan' जैसे समूहों के माध्यम से करोड़ों डॉलर का प्रवाह किया जा रहा है, जो प्रत्यक्ष रूप से AIPAC से जुड़े हैं।
Frequently Asked Questions
1. AIPAC क्या है?
यह एक गैर-पक्षपाती समूह है जो इजरायल के लिए अमेरिका के बिना शर्त समर्थन की वकालत करता है।
2. रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स ने AIPAC से दूरी क्यों बनाई?
उन्हें डर है कि मिशिगन जैसे विविध राज्य में AIPAC का समर्थन उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है।