पश्चिम बंगाल में SIR अपीलीय न्यायाधिकरणों ने बड़ी राहत देते हुए 91% मामलों में मतदाताओं के नाम वापस सूची में शामिल किए हैं। कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने चुनाव आयोग से डेटा में विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

  • SIR न्यायाधिकरणों द्वारा निपटाए गए 82,782 अपीलों में से 75,443 नामों को मतदाता सूची में बहाल किया गया है।
  • कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने चुनाव आयोग द्वारा दायर अतिरिक्त 10 लाख अपीलों पर सवाल उठाए हैं।
  • दक्षिण 24 परगना और हुगली जिलों में नामों के पुन: शामिल होने की दर सबसे अधिक रही है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनर्मूल्यांकन को लेकर चल रहा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, SIR अपीलीय न्यायाधिकरणों ने अब तक निपटाए गए कुल 82,782 अपीलों में से 91 प्रतिशत (75,443) मामलों में मतदाताओं के नाम वापस सूची में शामिल कर लिए हैं। इसके विपरीत, केवल 8.86 प्रतिशत (7,339) नामों को ही सूची से बाहर रखा गया है।

यह महत्वपूर्ण जानकारी चुनाव आयोग (EC) द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दी गई प्रतिक्रिया से सामने आई है। कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने इस डेटा का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चौधरी के अनुसार, 'अयोग्य' घोषित किए गए 27,28,500 मतदाताओं की तुलना में 38,10,620 अपीलें दायर की गई थीं, जो कि 10 लाख से अधिक का अंतर दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह डेटा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। यदि 91% मामलों में नाम बहाल किए जा रहे हैं, तो यह संकेत देता है कि प्रारंभिक चरण में बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों को 'अयोग्य' मानकर सूची से बाहर कर दिया गया था। यह न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, बल्कि इससे आम नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

यदि 91% बहालियां हो रही हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या प्रारंभिक निष्कासन प्रक्रिया में कोई बड़ी त्रुटि हुई थी?

कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस ने भी इस प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि 27 लाख बहिष्कृत मतदाताओं में से केवल 7 लाख लोग ही अब तक अपील करने में सक्षम हो पाए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया है कि अपीलीय न्यायाधिकरणों का उद्देश्य मतदाताओं को शामिल करना होना चाहिए था, न कि चुनाव आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए एक माध्यम बनना।

जिलावार डेटा विश्लेषण

जिलाकुल अपीलेंनाम बहाल (अनुमानित)नाम बाहर
दक्षिण 24 परगना3,21,33220,10724
हुगली-19,528-
मुर्शिदाबाद7,47,30543453
मालदा5,31,1491,4710

विवाद का एक अन्य पहलू यह है कि मतदाता सूची में नाम न होने के कारण कई नागरिक सरकारी लाभों से वंचित हो रहे हैं और विदेश यात्रा या रोजगार के अवसरों में भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। आगामी कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनावों को देखते हुए, विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से अपीलों के निपटारे के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाने की मांग की है।

Did You Know?: पश्चिम बंगाल के मालदा और उत्तर 24 परगना जिलों में निपटाए गए मामलों में 100% मतदाताओं के नाम बहाल किए गए हैं।

Frequently Asked Questions

1. SIR न्यायाधिकरण क्या हैं?
ये अपीलीय न्यायाधिकरण हैं जो मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर की गई शिकायतों का निपटारा करते हैं।

2. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं का 'अयोग्य' घोषित किया जाना और अपीलों की संख्या तथा अयोग्य घोषित लोगों की संख्या के बीच का अंतर है।