रोहतक सांसद डीपेंद्र हुड्डा ने गुरुग्राम में जलभराव और बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने शहर के विकास के नाम पर भारी भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं।

  • डीपेंद्र हुड्डा ने गुरुग्राम की नागरिक सुविधाओं और जलभराव की समस्या पर भाजपा सरकार को घेरा।
  • हुड्डा ने गुरुग्राम के विकास शुल्क के रूप में वसूले गए ₹15,000 करोड़ के CAG ऑडिट की मांग की।
  • गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह पर जलभराव संबंधी महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया।
  • सांसद राव ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से शहर की समस्याओं के समाधान के लिए हस्तक्षेप की मांग की।

रोहतक के सांसद डीपेंद्र हुड्डा ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गुरुग्राम की बदहाल नागरिक सुविधाओं, लगातार होने वाले जलभराव, ट्रैफिक जाम और स्वच्छता की समस्याओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कड़ा प्रहार किया। हुड्डा ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम की तीव्र आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ वहां के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं हो पाया है।

हुड्डा ने कहा कि गुरुग्राम की समस्याएं अब पूरे देश में दिखाई देने लगी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा सरकार इन समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि गुरुग्राम का बुनियादी ढांचा मजबूत होता है, तो दिल्ली पर आबादी का बोझ भी कम होगा, क्योंकि हजारों लोग प्रतिदिन काम के लिए दिल्ली से गुरुग्राम आते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि गुरुग्राम, जिसे कभी 'मिलेनियम सिटी' के रूप में जाना जाता था, अब अपनी खराब नागरिक प्रबंधन के कारण नए निवेश को आकर्षित करने में संघर्ष कर रहा है। हुड्डा ने गुरुग्राम सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने जलभराव की समस्या को कांग्रेस की विरासत बताया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।

गुरुग्राम का विकास केवल ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि मजबूत जल निकासी और बुनियादी ढांचे से तय होगा।

हुड्डा ने वित्तीय जवाबदेही की मांग करते हुए गुरुग्राम के निवासियों से वसूले गए ₹15,000 करोड़ के 'एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज' और 'इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज' के CAG ऑडिट की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने पिछले पांच वर्षों में जल निकासी पर ₹4,000 करोड़ और स्वच्छता पर ₹2,000 करोड़ खर्च किए हैं, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हुड्डा ने कांग्रेस शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि 2008 में गुरुग्राम नगर निगम की स्थापना हुई थी और इसी दौरान शहर को मेट्रो और रैपिड मेट्रो से जोड़ा गया था। उन्होंने गोल्फ कोर्स रोड के विकास और द्वारका एक्सप्रेसवे के महत्वपूर्ण कार्य का श्रेय भी पिछली सरकार को दिया।

दूसरी ओर, सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की और शहर में जलभराव और कचरा प्रबंधन के मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से मानसून पूर्व दिए गए आश्वासनों पर जवाब मांगा और प्राकृतिक जल निकासी चैनलों के सर्वेक्षण तथा अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सुझाव दिया।

Did You Know?: गुरुग्राम को अक्सर 'मिलेनियम सिटी' कहा जाता है, लेकिन नागरिक समस्याओं के कारण स्थानीय लोग इसे अब 'जाल-ग्राम' या 'गड्ढा-ग्राम' जैसे नामों से पुकारने लगे हैं।

Frequently Asked Questions

1. डीपेंद्र हुड्डा ने किस बात के लिए ऑडिट की मांग की है?
हुड्डा ने गुरुग्राम के निवासियों से वसूले गए ₹15,000 करोड़ के विकास शुल्क का CAG ऑडिट करने की मांग की है।

2. सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री को क्या सुझाव दिया?
उन्होंने वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से इसे कृत्रिम झीलों और जलाशयों तक ले जाने का सुझाव दिया।