मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के खिलाफ विशेष विधान सत्र बुलाने की घोषणा की है। सरकार का तर्क है कि इस रिपोर्ट के लागू होने से राज्य के हजारों गांवों में कृषि और आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा।

  • मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के खिलाफ विशेष विधानसभा सत्र बुलाने का निर्णय लिया है।
  • रिपोर्ट के लागू होने से 10 जिलों के 1,449 गांवों में खेती और आजीविका प्रभावित होने का खतरा है।
  • राज्य सरकार जल्द ही सूखे की स्थिति घोषित कर केंद्र से वित्तीय सहायता मांगेगी।
  • स्थानीय निकायों के चुनाव नवंबर-दिसंबर तक आयोजित किए जा सकते हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि राज्य सरकार कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के विरोध में एक विशेष विधान सत्र बुलाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस रिपोर्ट के कार्यान्वयन से होने वाले परिणामों पर चर्चा करना और इसके खिलाफ एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजना है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के हालिया कदम पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र ने रिपोर्ट के ड्राफ्ट को एकतरफा रूप से अधिसूचित कर दिया है, जबकि कर्नाटक कैबिनेट ने सितंबर 2024 में ही इसे खारिज कर दिया था। शिवकुमार के अनुसार, यह ड्राफ्ट राज्य के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि यह बुनियादी ढांचे, खनन, बिजली, निर्माण और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट केवल एक पर्यावरण संबंधी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है। यदि यह रिपोर्ट लागू होती है, तो पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में विकास कार्य लगभग ठप हो सकते हैं, जिससे बेरोजगारी और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।

"केंद्र का एकतरफा निर्णय कर्नाटक के लाखों किसानों और स्थानीय समुदायों के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है," विशेषज्ञों का मानना है।

रिपोर्ट के प्रभाव का आकलन करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक के 10 जिलों के 33 तालुकों में स्थित 1,449 गांवों की आजीविका और कृषि सीधे तौर पर प्रभावित होगी। यह क्षेत्र लगभग 20,668 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। सरकार वर्तमान में कानूनी विशेषज्ञों और तकनीकी सलाहकारों के साथ मिलकर इस पर जवाबी रणनीति तैयार कर रही है।

सूखा और अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं

पर्यावरण के साथ-साथ, मुख्यमंत्री ने राज्य में सूखे की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 102 तालुकों में वर्षा की कमी के आकलन के बाद, राजस्व विभाग अगले एक-दो दिनों में आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा कर सकता है। इसके तुरंत बाद, केंद्र से वित्तीय सहायता मांगने के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।

इसके अतिरिक्त, शिवकुमार ने स्थानीय निकाय चुनावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संकेत दिया कि ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण सहित कई शहरी और ग्रामीण निकायों के चुनाव इस वर्ष के अंत तक, संभवतः नवंबर में, कराए जा सकते हैं। इससे राज्य को केंद्रीय सहायता और अनुदान प्राप्त करने में होने वाली देरी से राहत मिलेगी।

Did You Know?: कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए बनाई गई थी, लेकिन इसके कार्यान्वयन को लेकर राज्यों और पर्यावरणविदों के बीच गहरा विवाद है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कर्नाटक सरकार विशेष सत्र क्यों बुला रही है?
उत्तर: कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के खिलाफ एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित करने और केंद्र को अपना विरोध दर्ज कराने के लिए।

प्रश्न 2: रिपोर्ट से कितने क्षेत्र प्रभावित होंगे?
उत्तर: रिपोर्ट के लागू होने से 10 जिलों के 1,449 गांवों और लगभग 20,668 वर्ग किमी क्षेत्र में कृषि और विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।