कर्नाटक के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद मतदाता सूची से 1.08 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिसमें बेंगलुरु के पांच निर्वाचन क्षेत्रों में 50% से अधिक मतदाताओं के नाम गायब हैं। पारदर्शिता की कमी और डेटा के अभाव ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कर्नाटक की मतदाता सूची में 19.5% की भारी गिरावट आई है, जिससे कुल मतदाता 5.13 करोड़ से घटकर 4.46 करोड़ रह गए हैं।
  • बेंगलुरु के पांच प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में 50% से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा लिंग-वार डेटा और सुलभ खोज योग्य सूचियों की कमी पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।

कर्नाटक में हाल ही में संपन्न हुए विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद जारी मसौदा मतदाता सूची ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। राज्य की मतदाता सूची में भारी गिरावट देखी गई है, जो अन्य प्रमुख राज्यों की तुलना में काफी असामान्य है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कुल मतदाता संख्या 5.13 करोड़ से घटकर 4.46 करोड़ रह गई है, जिसका अर्थ है कि लगभग 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

यह गिरावट राज्य के 224 विधानसभा क्षेत्रों में फैली हुई है, लेकिन सबसे चिंताजनक स्थिति बेंगलुरु के शहरी क्षेत्रों में देखी गई है। बेंगलुरु के पांच निर्वाचन क्षेत्रों—बोम्मनहल्ली (54.8%), दशरथहल्ली (52.1%), बी.टी.एम लेआउट (51.6%), विजयनगर (51.1%), और सी.वी. रमन नगर (51.1%)—में आधे से अधिक मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं। यह किसी भी प्रमुख राज्य में देखा गया एक अभूतपूर्व मामला है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गहरा संदेह पैदा करता है। यदि एक बड़ा हिस्सा 'स्थानांतरित' या 'अनुपस्थित' बताकर हटा दिया जाता है, तो यह वास्तविक मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर सकता है। विशेष रूप से, 1.08 करोड़ विलोपन में से 50% केवल 36 विधानसभा क्षेत्रों से आते हैं, जो डेटा की सटीकता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का अचानक गायब होना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और समावेशिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि कर्नाटक की वर्तमान मतदाता सूची अनुमानित पात्र मतदाताओं की संख्या से कम से कम 67 लाख कम है। इसके अलावा, पारदर्शिता का मुद्दा भी गंभीर है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर विलोपन की सूची को आसानी से खोजने योग्य प्रारूप में नहीं रखा गया है, जिससे आम नागरिक के लिए यह पता लगाना कठिन हो गया है कि उनका नाम कटा है या नहीं।

एक और महत्वपूर्ण चिंता लिंग-वार डेटा का अभाव है। अन्य राज्यों के विपरीत, कर्नाटक प्रशासन ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि हटाए गए लोगों में महिलाओं, पुरुषों या ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की संख्या कितनी है। जब इस बारे में पूछा गया, तो CEO कार्यालय ने कहा कि उनके पास यह डेटा उपलब्ध नहीं है।

Did You Know?: कर्नाटक में विलोपन का सबसे बड़ा कारण 'मृत्यु' नहीं, बल्कि 'स्थानांतरित' या 'अनुपस्थित' होना बताया गया है, जो केवल 15.2% मामलों में है।

Frequently Asked Questions

1. कर्नाटक में कितने मतदाता सूची से हटाए गए हैं?
कुल मिलाकर लगभग 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

2. किन क्षेत्रों में सबसे अधिक विलोपन देखा गया?
बेंगलुरु के शहरी क्षेत्रों जैसे बोम्मनहल्ली और दशरथहल्ली में 50% से अधिक विलोपन देखा गया है।