मेघालय विधानसभा ने राज्य में यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना का विरोध करने का एक ऐतिहासिक प्रस्ताव अपनाया है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कहा कि सरकार स्थानीय समुदायों की मांगों के साथ खड़ी है।
- मेघालय विधानसभा ने यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण का विरोध करने का संकल्प लिया।
- मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने स्थानीय समुदायों के अधिकारों का समर्थन किया।
- राज्य में भारत के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 16% मौजूद है।
- यह निर्णय छठा अनुसूची और सुप्रीम कोर्ट के 2019 के आदेश पर आधारित है।
शिलांग: मेघालय विधानसभा ने बुधवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य में यूरेनियम खनन और यूरेनियम अयस्क प्रसंस्करण सुविधा स्थापित करने के किसी भी प्रयास का विरोध करने का प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 60 सदस्यीय सदन में यह प्रस्ताव पेश किया और स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यूरेनियम युक्त क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों के साथ पूरी तरह से एकजुट है।
मुख्यमंत्री ने सदन को सूचित किया कि यह निर्णय न केवल जनभावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के 2019 के उस महत्वपूर्ण आदेश का भी पालन करता है, जिसमें निजी और सामुदायिक भूमि मालिकों के अपने भूमि के ऊपर और नीचे मौजूद खनिजों पर अधिकारों को मान्यता दी गई थी। संगमा ने जोर देकर कहा कि मेघालय संविधान की छठी अनुसूची के तहत एक विशिष्ट संवैधानिक और पारंपरिक ढांचे द्वारा शासित है, जो भूमि और संसाधनों पर समुदाय, वंश और व्यक्तिगत स्वामित्व की रक्षा करता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केंद्र सरकार और राज्य के बीच खनिज अधिकारों को लेकर होने वाले संभावित टकराव को रेखांकित करता है। मेघालय में यूरेनियम के विशाल भंडार होने के बावजूद, वहां के समुदायों ने झारखंड के जादुगुड़ा में यूरेनियम खनन के स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा का यह प्रस्ताव एक कानूनी ढाल के रूप में कार्य करेगा जो दशकों पुराने जन आंदोलनों को मजबूती प्रदान करेगा।
मेघालय का यह निर्णय खनिज संपदा बनाम जन स्वास्थ्य और आदिवासी अधिकारों के बीच चल रहे वैश्विक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
यह विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से 28 अक्टूबर को मनाए जाने वाले 'एंटी-यूरेनियम डे' से पहले आया है। यह दिन 1990 के दशक में डोमियासिएट, लोस्टोइन, माउथबाह और वाहकाजी क्षेत्रों में यूरेनियम अन्वेषण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाली महिला नेता स्पिलिटी लिंगदोह लैंगरीन की स्मृति में मनाया जाता है। लैंगरीन ने सरकारी प्रस्तावों को ठुकरा कर अपनी भूमि और समुदाय की रक्षा की थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मेघालय के दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले में भारत के सबसे बड़े उच्च श्रेणी के यूरेनियम भंडार में से एक है। अनुमान के मुताबिक, राज्य में 9.22 मिलियन टन यूरेनियम जमा है, जो देश के कुल भंडार का 16% है। यह झारखंड और आंध्र प्रदेश के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। 1993 में परमाणु खनिज निदेशालय द्वारा की गई ड्रिलिंग के बाद से ही स्थानीय लोग इसके खिलाफ सक्रिय हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अनुमानित भंडार | 9.22 मिलियन टन |
| भारत में स्थान | तीसरा सबसे बड़ा (झारखंड और आंध्र के बाद) |
| प्रमुख क्षेत्र | डोमियासिएट, लोस्टोइन, माउथबाह, वाहकाजी |
Frequently Asked Questions
1. मेघालय विधानसभा ने यह प्रस्ताव क्यों पारित किया?
स्थानीय समुदायों की सुरक्षा और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए, विशेष रूप से यूरेनियम खनन के स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए।
2. मेघालय में यूरेनियम का कितना भंडार है?
मेघालय में लगभग 9.22 मिलियन टन यूरेनियम है, जो भारत के कुल भंडार का 16% है।