बिहार सरकार ने ग्रामीण स्तर पर कर संग्रह को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायतों को होल्डिंग टैक्स लगाने की अनुमति दी। 45,000 से अधिक राजस्व गाँवों से 1,300 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ग्राम पंचायतों को घरों व व्यावसायिक संस्थाओं पर होल्डिंग टैक्स लगाने की नई शक्ति मिली।
  • राजस्व संग्रह का लक्ष्य 1,300 करोड़ रुपये, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार की उम्मीद।
  • एकत्रित कर ग्राम स्तर पर अवसंरचना विकास जैसे सड़कों, जल एवं स्वच्छता के लिए उपयोग होगा।

बिहार की वित्तीय तंगी को देखते हुए राज्य सरकार ने ग्रामीण कर व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है। पटना में 17 जुलाई, 2026 को बिहार कैबिनेट ने ‘ग्राम पंचायत टैक्स, दरें और शुल्क नियम, 2026’ को मंजूरी दी, जिससे ग्राम पंचायतों को घर, पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसियों तथा अन्य व्यावसायिक संस्थाओं पर होल्डिंग टैक्स लगाने का अधिकार मिला।

पृष्ठभूमि और लक्ष्य

बिहार में 45,000 से अधिक राजस्व गाँव हैं, जहाँ से सरकार 1,300 करोड़ रुपये वार्षिक कर संग्रह का लक्ष्य रखती है। वर्तमान में राज्य का वार्षिक राजस्व लगभग 60,000 करोड़ रुपये है, जबकि बजट 3.5 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। केंद्रित करों, विशेषकर जीएसटी, एवं विभिन्न अनुदानों पर निर्भरता को घटाकर, स्थानीय निकायों की आत्मनिर्भरता बढ़ाना प्राथमिक उद्देश्य है।

टैक्स की संरचना

नियमों के अनुसार कच्चे घरों से टैक्स मुक्त किया गया है, जबकि अर्ध-पूरी घरों पर वार्षिक 50 रुपये, पूरी तरह बने घरों पर 100 रुपये एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत निर्मित घरों पर 25 रुपये का रियायती दर निर्धारित किया गया है। व्यावसायिक संस्थाओं जैसे पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसी, ईंट भठ्ठी व सिनेमा हॉल पर वार्षिक 5,000 रुपये का शुल्क लगेगा। इसके अतिरिक्त सफ़ाई, जल आपूर्ति, पेशा, व्यापार एवं विज्ञापन पर भी छोटे-छोटे शुल्क निर्धारित किए गए हैं।

राजस्व का उपयोग

एकत्रित कर सीधे ग्राम पंचायतों के पास रहेगा और इसे केवल स्थानीय बुनियादी ढाँचे—जैसे ग्रामीण सड़कों, नाली नेटवर्क, स्वच्छता एवं पीने योग्य पानी की सुविधाओं—के विकास में उपयोग किया जाना चाहिए। यह व्यवस्था बिहार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, अर्विंद कुमार चौधरी के अनुसार, स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने और राज्य की वित्तीय निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

भविष्य की संभावनाएँ

नयी टैक्स नीति के माध्यम से राज्य सरकार 2028 तक वार्षिक आंतरिक राजस्व को 1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने की योजना बना रही है। हालांकि, विरोधी दलों और ठेकेदार संघों ने राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएँ जताई हैं, विशेषकर देनदारियों और आकस्मिक निधि के उपयोग को लेकर। इन चुनौतियों के बावजूद, यह पहल बिहार को वित्तीय रूप से स्वावलंबी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है।