डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की 17वीं बार अस्थायी रिहाई ने पंजाब में सिख संगठनों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। संगठनों ने जग्तर सिंह हवाला और अन्य बंदी सिंहों को parole न मिलने पर भेदभाव का आरोप लगाया है।
- राम रहीम को 21 दिनों के फरलो (furlough) पर सूरजनिया जेल से रिहा किया गया।
- सिख संगठनों ने राम रहीम और जग्तर सिंह हवाला के बीच 'दोहरे कानून' का आरोप लगाया।
- जग्तर सिंह हवाला की बीमार मां से मिलने के लिए parole की मांग लंबे समय से लंबित है।
- राम रहीम 2017 के बाद से अब तक 17 बार जेल से बाहर आ चुका है।
हरियाणा की सूरजनिया जेल से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को मंगलवार सुबह 6:05 बजे 21 दिनों के फरलो पर रिहा कर दिया गया। यह इस साल उनकी तीसरी और 2017 में सजा मिलने के बाद उनकी 17वीं अस्थायी रिहाई है। राम रहीम, जो बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं, इस अवधि के दौरान सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहेंगे।
इस घटनाक्रम ने पंजाब के सिख संगठनों को फिर से आक्रोशित कर दिया है। सिख समूहों का तर्क है कि जहाँ एक ओर बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के दोषियों को 'पिकनिक' की तरह बार-बार बाहर आने की अनुमति दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर 'बंदी सिंहों' (सिख कैदियों) को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत रिहाई का नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली की निष्पक्षता और 'दोहरे मापदंडों' का है। सिख संगठनों का आरोप है कि कानून का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से किया जा रहा है, जिससे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँच रही है।
सिख कौम के साथ हो रहा यह भेदभाव न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि राम रहीम को बार-बार बाहर आने की अनुमति दी जा रही है, जबकि जग्तर सिंह हवाला जैसे कैदी, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं या parole के पात्र हैं, जेल में बंद हैं। हवाला, जो पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, अपनी बीमार मां से मिलने के लिए महीनों से parole का इंतजार कर रहे हैं।
क्वामी इंसाफ मोर्चा के संयोजक पल सिंह फ्रांस ने कहा कि राम रहीम को फरलो का लाभ तब मिलता है जब उन्हें जरूरत होती है, जबकि जेल मैनुअल के अनुसार फरलो आपातकालीन स्थितियों के लिए होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल रहा है (passing the buck)।
राम रहीम की रिहाई का इतिहास
| अवधि/वर्ष | प्रकार | विवरण |
|---|---|---|
| 2020 | पैरौल | 1 दिन |
| 2021 | पैरौल | 12 घंटे (मां से मिलने हेतु) |
| 2022 | फरलो/पैरौल | 21 दिन, 30 दिन, 40 दिन |
| 2023 | पैरौल/फरलो | 40 दिन, 30 दिन, 21 दिन |
| 2024 | फरलो | 50 दिन |
जग्तर सिंह हवाला का मामला भी पेचीदा बना हुआ है। दिल्ली की मंडोली जेल में बंद हवाला ने अपनी मां से मिलने के लिए 28 दिनों की पैरौल मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने केवल 2 दिनों की पुलिस कस्टडी वाली पैरौल का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. राम रहीम को फरलो पर क्यों छोड़ा गया?
राम रहीम को हरियाणा के नियमों के तहत 21 दिनों के फरलो पर रिहा किया गया है, जो अस्थायी राहत का एक कानूनी प्रावधान है।
2. बंदी सिंह कौन हैं?
बंदी सिंह उन सिख कैदियों को कहा जाता है जो लंबे समय से जेल में हैं और सजा पूरी होने या मानवीय आधार पर रिहाई की मांग कर रहे हैं।