पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में व्याप्त 'धमकी संस्कृति' पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रवाद को पुनर्जीवित करने और छात्र राजनीति के पुराने ढर्रे को बदलने का संकल्प लिया।

  • सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय में 'धमकी संस्कृति' को खत्म करने की मांग की।
  • उन्होंने छात्र राजनीति में राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए 'वन्दे मातरम' कार्यक्रम का आयोजन किया।
  • अधिकारी ने TMC और वामपंथी सरकारों पर सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
  • उन्होंने छात्रों को कश्मीर और फिलिस्तीन के बजाय PoK की आजादी के लिए आवाज उठाने की सलाह दी।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) के बाहर आयोजित एक विशाल कार्यक्रम के दौरान तीखे प्रहार किए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में व्याप्त कथित 'धमकी संस्कृति' (threat culture) को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि परिसर के भीतर और बाहर राष्ट्रवाद की भावना को फिर से स्थापित किया जाए।

यह कार्यक्रम पिछले सप्ताह विश्वविद्यालय में ABVP और SFI के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद आयोजित किया गया था। अधिकारी के अनुसार, इस 'वन्दे मातरम' कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एक ऐसी संस्कृति विकसित हो गई है जहाँ असहमति को दबाने के लिए डर का सहारा लिया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जादवपुर विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ होने वाली छात्र राजनीति सीधे तौर पर राज्य की सत्ता और विचारधारा की लड़ाई को प्रभावित करती है। सुवेंदु अधिकारी का यह रुख विश्वविद्यालय के राजनीतिक ढांचे को बदलने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

'जादवपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रवाद की भावना को फिर से जगाना केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुद्धार की एक कोशिश है।'

अधिकारी ने पूर्ववर्ती TMC और वामपंथी सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर छात्रों को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से दूर रखा। उन्होंने दावा किया कि कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रभाव के कारण छात्रों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के प्रति उदासीनता देखी गई। उन्होंने कहा, "उनके घरों में आपको टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय या ईश्वर चंद्र विद्यासागर की तस्वीरें कभी नहीं मिलेंगी।"

मुख्यमंत्री ने TMC पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी लाभ के लिए छात्र समूहों के साथ सांठगांठ की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गठबंधन केवल भाजपा को रोकने के लिए बनाया गया था, जिसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ प्राप्त करना था।

कार्यक्रम के दौरान, अधिकारी ने छात्रों द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की भी आलोचना की। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे कश्मीर या फिलिस्तीन की आजादी के नारे लगा रहे हैं, तो उन्हें पहले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की आजादी के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत निश्चित रूप से PoK को वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जादवपुर विश्वविद्यालय ऐतिहासिक रूप से छात्र आंदोलनों और वामपंथी विचारधारा का गढ़ रहा है। दशकों से, यहाँ के छात्र राजनीति के केंद्र रहे हैं, जो अक्सर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति के साथ टकराते रहे हैं। हाल के वर्षों में, यहाँ के राजनीतिक परिदृश्य में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी विचारधाराओं का प्रवेश एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

Did You Know?: जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है, जो अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के लिए जाना जाता है।

Frequently Asked Questions

1. सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में 'धमकी संस्कृति' व्याप्त है और इसे समाप्त कर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

2. 'वन्दे मातरम' कार्यक्रम का आयोजन क्यों किया गया?
यह कार्यक्रम ABVP और SFI के बीच हुई झड़पों के बाद छात्रों में राष्ट्रवादी भावना जगाने के लिए आयोजित किया गया था।