बीआरएस नेता हरीश राव ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने चुनाव पूर्व किए गए दिव्यांगों से जुड़े वादों को पूरा नहीं किया है। उन्होंने पेंशन और आरक्षण के मुद्दों पर सरकार को घेरा है।
- बीआरएस नेता हरीश राव ने कांग्रेस सरकार पर दिव्यांगों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया।
- आरोप है कि चुनाव पूर्व किए गए ₹6,000 मासिक पेंशन के वादे को पूरा नहीं किया गया।
- बीआरएस शासन के दौरान पेंशन ₹500 से बढ़ाकर ₹4,016 की गई थी।
हैदराबाद में आयोजित 'समर शंखरावम' कार्यक्रम के दौरान भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधानसभा उप नेता टी. हरीश राव ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग, यानी दिव्यांगजनों के साथ विश्वासघात किया है और अपने चुनावी वादों को पूरी तरह भुला दिया है।
हरीश राव ने कहा कि बीआरएस शासन के दौरान दिव्यांगों को केवल एक 'वोट बैंक' नहीं माना गया, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ समाज में जगह दी गई। उन्होंने याद दिलाया कि केसीआर सरकार के कार्यकाल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को मात्र ₹500 से बढ़ाकर ₹4,016 कर दिया गया था। बीआरएस ने पिछले 10 वर्षों में आसरा पेंशन पर लगभग ₹54,000 करोड़ खर्च किए, जिसमें से ₹10,300 करोड़ विशेष रूप से दिव्यांगों के कल्याण के लिए आवंटित किए गए थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तेलंगाना में सामाजिक कल्याण योजनाओं और चुनावी वादों के बीच का यह अंतर आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। दिव्यांगजनों के प्रति सरकार का रुख न केवल सामाजिक न्याय का मुद्दा है, बल्कि यह राज्य के समावेशी विकास के दावे पर भी सवाल उठाता है।
कांग्रेस सरकार ने दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ के लिए वादे किए हैं।
बीआरएस नेता ने सरकार से पूछा कि ₹6,000 मासिक पेंशन, मुफ्त आरटीसी बस यात्रा और आरक्षित पदों को भरने जैसे वादों का क्या हुआ? उन्होंने दावा किया कि राज्य में लगभग 5.11 लाख दिव्यांगजन हैं और पिछले 33 महीनों से बढ़ी हुई पेंशन न मिलने के कारण प्रति व्यक्ति बकाया राशि लगभग ₹66,000 हो गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2015 में, तेलंगाना ने 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम' (Rights of Persons with Disabilities Act) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया था। उस समय के केसीआर प्रशासन ने शिक्षा और रोजगार में 4% आरक्षण और आवास योजनाओं में 5% आरक्षण सुनिश्चित किया था।
| विशेषता | बीआरएस शासन (KCR) | कांग्रेस शासन (वर्तमान) |
|---|---|---|
| मासिक पेंशन | ₹4,016 तक बढ़ाई गई | वादा ₹6,000, लेकिन कार्यान्वयन शून्य |
| आरक्षण (शिक्षा/रोजगार) | 4% सुनिश्चित किया | अनिश्चितता का माहौल |
| पेंशन भुगतान | नियमित मासिक भुगतान | बकाया और अनियमित |
Frequently Asked Questions
1. हरीश राव ने किन मुख्य वादों के टूटने का आरोप लगाया है?
उन्होंने ₹6,000 मासिक पेंशन, मुफ्त बस यात्रा और सरकारी नौकरियों में आरक्षित पदों को भरने के वादों के टूटने का आरोप लगाया है।
2. बीआरएस के दौरान दिव्यांगों के लिए क्या सुविधाएं थीं?
बीआरएस के दौरान पेंशन ₹500 से बढ़ाकर ₹4,016 की गई थी और शिक्षा एवं रोजगार में 4% आरक्षण दिया गया था।