जेडी(एस) नेता गुरुरज हुनासिमरद ने कर्नाटक सरकार से मांग की है कि धारवाड़ जिले को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए और किसानों को तत्काल राहत प्रदान की जाए।
- जेडी(एस) ने धारवाड़ को सूखा प्रभावित सूची में शामिल करने की मांग की है।
- दावा किया गया है कि जिले की 85% फसलें मानसून की विफलता के कारण सूख गई हैं।
- सरकार ने 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, लेकिन धारवाड़ को छोड़ दिया है।
- किसानों के लिए मुआवजे और तत्काल जमीनी मूल्यांकन की मांग की गई है।
कर्नाटक के धारवाड़ जिले में कृषि संकट गहराता जा रहा है। जनता दल (सेकुलर) के जिला अध्यक्ष गुरुरज हुनासिमरद ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य सरकार से मांग की है कि धारवाड़ को आधिकारिक तौर पर सूखा प्रभावित जिले के रूप में घोषित किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उत्तर कर्नाटक की जमीनी हकीकत को समझे बिना ही निर्णय लिए हैं।
हुनासिमरद ने बताया कि हालांकि सरकार ने राज्य के 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, लेकिन दुखद रूप से धारवाड़ जिले के किसी भी तालुके को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय स्थानीय किसानों की पीड़ा को अनदेखा करके लिया गया है, जबकि क्षेत्र में सूखे की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में सूखा केवल एक मौसम संबंधी घटना नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक संकट है। यदि समय पर राहत नहीं दी गई, तो यह ग्रामीण ऋणग्रस्तता और पलायन को बढ़ावा दे सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता के कारण धारवाड़ जिले की लगभग 85% फसलें सूख चुकी हैं। बारिश की कमी का असर अब रबी की फसलों पर भी पड़ने लगा है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
यदि सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो किसान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
हुनासिमरद ने जिले के मंत्रियों और विधायकों से राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के हित में सरकार पर दबाव बनाने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत एक जमीनी स्तर का मूल्यांकन (field-level assessment) करे और फसल नुकसान के लिए उचित मुआवजा प्रदान करे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नाटक का उत्तरी भाग ऐतिहासिक रूप से वर्षा की अनिश्चितता से जूझता रहा है। मानसून की विफलता अक्सर कृषि उत्पादन में भारी गिरावट लाती है, जिससे राज्य की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार होता है।
Frequently Asked Questions
1. जेडी(एस) की मुख्य मांग क्या है?
जेडी(एस) की मांग है कि धारवाड़ को सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया जाए और किसानों को मुआवजा दिया जाए।
2. धारवाड़ में फसलों की स्थिति क्या है?
दावों के अनुसार, जिले की लगभग 85% फसलें मानसून की कमी के कारण सूख गई हैं।