कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने KPSC भर्ती अनियमितताओं के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी को कड़ी चुनौती दी है। खरगे ने कुमारस्वामी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए उनके पुराने कार्यकाल पर भी सवाल उठाए हैं।
- KPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस और JD(S) के बीच टकराव तेज।
- केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र गंगवार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
- प्रियंक खरगे ने कुमारस्वामी के आरोपों को अमित शाह के निर्देश पर किया गया हमला बताया।
- खरगे ने कुमारस्वामी के पूर्व मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों पर भी सवाल उठाए।
कर्नाटक की राजनीति में KPSC (कर्नाटक लोक सेवा आयोग) भर्ती मामले को लेकर घमासान मच गया है। कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का कड़ा जवाब दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने भर्ती अनियमितताओं के बीच एक वरिष्ठ IAS अधिकारी को भागने दिया।
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र गंगवार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। गंगवार उस समय KPSC के परीक्षा नियंत्रक थे जब सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (ग्रेड-I) की भर्ती में कथित धांधली हुई थी। कुमारस्वामी ने इस मुद्दे पर प्रियंक खरगे के इस्तीफे की भी मांग की थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल एक प्रशासनिक चूक का मामला नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा मुद्दा बन गया है। KPSC जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता की कमी सीधे तौर पर सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, जिसका लाभ विपक्षी दल उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
"राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अब प्रशासनिक जवाबदेही से हटकर व्यक्तिगत हमलों में बदल रहे हैं, जो लोकतांत्रिक बहस के स्तर को कम करता है।"
इन आरोपों का जवाब देते हुए, प्रियंक खरगे ने कुमारस्वामी पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, "अब तक प्रियंक खरगे का नाम भाजपा नेताओं को रोजगार देने और उन्हें चर्चा में रहने का मसाला देने के लिए जाना जाता था। अब JD(S) नेता भी इस नाम को पसंद करने लगे हैं।"
खरगे ने कुमारस्वामी के इरादों पर संदेह व्यक्त करते हुए सुझाव दिया कि उन्हें शायद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उन्हें निशाना बनाने का काम सौंपा गया है। उन्होंने अतीत का रुख करते हुए याद दिलाया कि कुमारस्वामी के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी KPSC भर्तियों, विशेष रूप से 1998 में KAS अधिकारियों की भर्ती में अनियमितताएं हुई थीं।
अंत में, प्रियंग खरगे ने स्पष्ट किया कि कुमारस्वामी के चरित्र हनन के प्रयास सफल नहीं होंगे और वे सभी आरोपों के जवाब में तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. KPSC विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का मुख्य कारण सहायक कार्यकारी इंजीनियरों की भर्ती में हुई कथित अनियमितताएं और संबंधित IAS अधिकारी पर कार्रवाई न होना है।
2. कुमारस्वामी ने क्या मांग की है?
एच.डी. कुमारस्वामी ने इस मामले में जिम्मेदारी लेते हुए प्रियंक खरगे के इस्तीफे की मांग की है।