मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अपना 11वां अनशन शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि उन सभी 58 लाख आवेदकों को कुनबी प्रमाणपत्र दिए जाएं जिनके रिकॉर्ड सत्यापित हो चुके हैं।
- मनोज जरांगे पाटिल ने अंतरवाली सरती में अपना 11वां भूख हड़ताल शुरू किया।
- मुख्य मांग 58 लाख सत्यापित आवेदकों को कुनबी प्रमाणपत्र प्रदान करना है।
- सरकार का दावा है कि अधिकांश प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि जरांगे इसे अपर्याप्त मान रहे हैं।
- धरशिव जिले से समर्थन में एक हजार रिक्शा का रैली निकालने की योजना है।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने शनिवार, 29 अगस्त 2026 को छत्रपति संभाजीनगर जिले के अंतरवाली सरती में अपना 11वां अनशन शुरू कर दिया है। जरांगे की मांग है कि उन सभी 58 लाख आवेदकों को कुनबी (Kunbi) प्रमाणपत्र दिए जाएं जिनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके आवेदन जाति जांच प्रक्रिया के दौरान खारिज कर दिए गए थे।
सरकार बनाम कार्यकर्ता: आंकड़ों का टकराव
इस मुद्दे पर सरकार और जरांगे के दावों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बताया कि अब तक प्राप्त 14,31,634 आवेदनों में से 14,24,634 लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, केवल 1,747 आवेदन लंबित हैं और 5,248 को खारिज किया गया है। विखे पाटिल ने स्पष्ट किया कि केवल 0.3% आवेदन ही अस्वीकृत हुए हैं।
दूसरी ओर, मनोज जरांगे का तर्क है कि सरकार डेटा को कम करके दिखा रही है। उनका कहना है कि उन सभी 58 लाख लोगों को हक मिलना चाहिए जिनका रिकॉर्ड सत्यापित है। जरांगे का आरोप है कि सरकार उन पात्र मराठाओं के आंकड़ों को कम करने की कोशिश कर रही है जो कुनबी श्रेणी के तहत आरक्षण के हकदार हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष केवल प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने वाला एक बड़ा मुद्दा है। कुनबी प्रमाणपत्र मिलना मराठा समुदाय के लिए ओबीसी (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। यदि यह गतिरोध बना रहता है, तो राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
मराठा आरक्षण का यह आंदोलन अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल चुका है।
इस तनाव के बीच, स्थानीय संगठनों ने जरांगे के समर्थन में एकजुटता दिखाने का निर्णय लिया है। धरशिव जिले से एक हजार रिक्शा की एक विशाल रैली अंतरवाली सरती की ओर रवाना होने की योजना है, जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल होंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मराठा आरक्षण की मांग महाराष्ट्र में दशकों से चली आ रही है। कुनबी प्रमाण पत्र के माध्यम से मराठा समुदाय के उन लोगों को ओबीसी का दर्जा देने की मांग की जा रही है, जिनके पास ऐतिहासिक रूप से कुनबी होने के प्रमाण हैं। मनोज जरांगे पाटिल इस आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मनोज जरांगे की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: उनकी मांग है कि सभी 58 लाख सत्यापित आवेदकों को कुनबी प्रमाणपत्र दिए जाएं ताकि वे आरक्षण का लाभ उठा सकें।
प्रश्न 2: सरकार का इस पर क्या रुख है?
उत्तर: सरकार का कहना है कि अधिकांश प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं और केवल बहुत कम आवेदन लंबित या खारिज हुए हैं।